साहब मैं जिंदा हूं… जिसे वोटर लिस्ट में मृत घोषित किया, वो चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंच गया

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बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में जिंदा वोटर को मृत बताकर उनका नाम काटे जाने के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक मतदाता गुरुवार को पटना में राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय में पहुंच गया। भोजपुर जिले के रहने वाले मिंटू पासवान ने कहा कि एसआईआर में उनका नाम मृत लोगों की सूची में डाल दिया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग से कहा कि ‘वह जिंदा है’।

मिंटू पासवान ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि एसआईआर में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट रिवीजन के दौरान बूथ लेवल पदाधिकारी (बीएलओ) उनके घर नहीं आए थे। लेफ्ट पार्टी सीपीआई माले का एक प्रतिनिधिमंडल उन्हें पटना में राज्य निर्वाचन पदाधिकारी दफ्तर में ले गया। मिंटू पासवान ने इसी सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में पहुंचकर खुद के जिंदा होने का दावा किया था। इसके बाद वह चर्चा में आए थे।

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मिंटू के साथ मौजूद माले के सचिव कुणाल ने कहा कि इस तरह की विसंगतियों के कारण ही उनकी पार्टी एसआईआर का विरोध कर रही है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग द्वारा मिंटू पासवान से फॉर्म 6 भरकर नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने को कहा जा रहा है। जबकि वह पहले वोटर रहकर मतदान कर चुके हैं।

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उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने उन्हें संबंधित बीएलओ को फॉर्म जमा कराने को कहा है। जबकि खुद बीएलओ अपनी गलती मानकर कह रहा है कि किसी और व्यक्ति की जगह मिंटू का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया। माले सचिव ने कहा कि अगर बीएलओ सच कह रहा है, तो उस मृत व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जरूर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की इस गलती के चलते मिंटू को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि हमने अब तक कुल 21 लोगों की पहचान की है, जिन्हें गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया था। फिर उनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। इनमें से 10 लोगों को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि हम वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करते रहेंगे।

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