कश्मीर और लद्दाख को जोड़ने वाला सोनमर्ग टनल का पीएम मोदी ने किया उद्घटान, हर मौसम में यातायात होगा संभव

sonamarg tunnel

सोनमर्गः  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग में सोनमर्ग टनल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने उन मज़दूरों का धन्यवाद किया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर इस परियोजना को पूरा किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “चुनौतियों के बावजूद, हमारे संकल्प में कभी कमी नहीं आई।” उन्होंने मज़दूरों के दृढ़ संकल्प और उनके योगदान की सराहना की। प्रधानमंत्री ने 7 मज़दूरों के निधन पर गहरी संवेदना भी व्यक्त की।

महाकुभ और लोहड़ी की दी बधाई

प्रधानमंत्री ने इस दिन को विशेष बताते हुए कहा कि देश भर में त्योहारी माहौल है। उन्होंने प्रयागराज में शुरू हुए महाकुंभ, पंजाब और उत्तरी भारत में मनाई जा रही लोहड़ी, उत्तरायण, मकर संक्रांति और पोंगल जैसे पर्वों का उल्लेख किया। श्री मोदी ने इन सभी त्योहारों की बधाई दी।

sonamarg tunnal

सोनमर्ग टनल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए उपहार

प्रधानमंत्री ने सोनमर्ग टनल को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए एक बड़ा उपहार बताया। यह टनल सोनमर्ग, कारगिल और लेह के लोगों के जीवन को सुगम बनाएगी। भारी बर्फबारी, भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण जो रास्ते बंद हो जाते थे, अब उनकी समस्याओं का समाधान होगा। इस टनल से प्रमुख अस्पतालों तक पहुंच आसान होगी और ज़रूरी आपूर्ति बिना रुकावट पहुंच सकेगी।

2015 में शुरु हुआ तो निर्माण कार्य

प्रधानमंत्री ने बताया कि सोनमर्ग टनल का निर्माण कार्य 2015 में उनके शासनकाल में शुरू हुआ और अब यह पूरा हो चुका है। इस टनल से सर्दियों में भी सोनमर्ग में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सड़क और रेल संपर्क परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने जम्मू रेल डिवीजन और कश्मीर घाटी तक रेल कनेक्टिविटी की प्रगति का भी उल्लेख किया।

पर्यटन और रोजगार के लिए नई राहें

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2024 में जम्मू-कश्मीर में 2 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जिनमें से सोनमर्ग में पर्यटकों की संख्या 10 वर्षों में छह गुना बढ़ी है। उन्होंने बताया कि इससे स्थानीय व्यवसाय, होटल, होमस्टे, ढाबे और टैक्सी सेवाओं को लाभ हुआ है।

सोनमर्ग टनल की विशेषताएं

12 किमी लंबी इस परियोजना में 6.4 किमी की मुख्य टनल, निकासी टनल और संपर्क सड़कें शामिल हैं। 8,650 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह टनल सालभर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी, जिससे पर्यटन और रक्षा के लिए सामरिक महत्व वाले लद्दाख क्षेत्र तक निर्बाध पहुंच संभव होगी।

 

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