कोलकाता: कितना सुंदर दृश्य है ! अद्भूत ! कोई भी इसे देखने के लिए घंटों लाइन लग सकता है । 360 डिग्री वाले कोलकाता के चोर बगान पंडाल की चर्चा पूरे बंगाल में थी । लाखों लोग आ रहे थे । शनिवार को कालरात्रि के दिन सात बजकर चालीस मिनट से थोड़ी देर पहले बारिश शुरु हुई और फिर पंडाल गिर गया.. भगदड़ में 17 लोगों ने अपनी जान गंवा दी । कोलकाता में जिस चोर बगान में भगदड़ में कम से 17 लोगों के मारे जाने की खबर है उस पूजा पंडाल को देखने केे लिए हर दिन लाखों लोग आ रहे थे ।

वायरल पंडाल हो चुका था चोरबगान
सोशल मीडिया पर जो वीडियो शेयर किए गए हैं उसे देख कर लग रहा है कि भीड़़ इतनी थी कि पुलिस भी रहती तो स्थिति संभल नहीं सकती थी । सोशल मीडिया पर मौजूद एक वीडियो में दिख रहा है कि हादसे चंद मिनटों पहले माइक से अनाउंस किया जा रहा था कि बारिश हो रही है पंडाल गिर सकता है । लोगों से कहा जा रहा था कि पंडाल की ओर नहीं आए बावजूद लोग बड़ी संख्या में पंडाल की ओर पहुंच रहे थे । अचानक पंडाल गिर गया जिसके बार भगदड़ मच गई । वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कोलकाता के चोर बगान पूजा पंडाल को देखने कितने लोग सुबहृ-सुबह ही पहुंच गए थे । बताया जा रहा है कि वीआईपी पास की भी व्यवस्था फेल हो गई । चोर बगान पूजा पंडाल को कोलकाता के सर्वश्रेष्ठ पूजा पंडालों में गिना जा रहा था । बंगाल सरकार के संस्कृतति विभाग ने भी इस पंडाल को सम्मान दिया है।
मौन की थीम पर बना था पूजा पंडाल
कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में इसी रचनात्मकता को एक अनूठे रूप में प्रस्तुत करने की परिकल्पना की गई थी। यहां ‘Beyond Sound’ यानी ‘ध्वनि से परे’ थीम के माध्यम से खामोशी, ब्रह्मांड और आध्यात्मिक चेतना के गहरे संबंध को दर्शाने का प्रयास किया गया था ।कलाकार सुशांत शिवानी पाल की परिकल्पना पर आधारित इस थीम में आकाशीय रोशनी, ध्यानमग्न आकृतियों और मां दुर्गा की शाश्वत उपस्थिति के जरिए एक अलौकिक वातावरण रचने की कल्पना थी । इसका मकसद दर्शकों को ऐसा अनुभव देना है, जहां कला केवल देखने की वस्तु न रहकर आत्मिक अनुभूति का माध्यम बन जाए।
जब खामोशी भी कह रही थी अपनी कहानी
‘Beyond Sound’ की अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि हर अनुभूति को शब्दों या ध्वनि के माध्यम से व्यक्त करना जरूरी नहीं है। कई बार रोशनी, छाया, आकृतियां और वातावरण भी ऐसी भावनाओं को व्यक्त कर सकते हैं, जिन्हें शब्दों में समझाना मुश्किल होता है। कलात्मक प्रस्तुति में रोशनी की प्रत्येक किरण को एक कहानी और हर छाया को एक रहस्य के रूप में देखने की कल्पना की गई है। दर्शकों को बाहरी दुनिया से आगे बढ़कर अपने भीतर की संवेदनाओं और चेतना को महसूस करने का अवसर देने की कोशिश की गई है। इस थीम की खासियत ब्रह्मांडीय कल्पना और धार्मिक आस्था का मेल था। आकाशीय रोशनी और ध्यानमग्न आकृतियों के माध्यम से अनंत ब्रह्मांड की अनुभूति को मां दुर्गा की आध्यात्मिक उपस्थिति से जोड़ने की परिकल्पना की गई थी ।






