विश्व आदिवासी दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही दिल की बात, दिशोम गुरु शिबू सोरेन को ऐसे किया याद

विश्व आदिवासी दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही दिल की बात, दिशोम गुरु शिबू सोरेन को ऐसे किया याद

रांचीः 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन को याद करते हुए अपनी दिल की बात सोशल मीडिया अकाउंट एक्स के माध्यम से लोगों के बीच रखी है। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड में भव्य कार्यक्रम होता है। इस साल भी 9 से 11 अगस्त तक रांची के मोरहाबादी मैदान में तीन दिवसीय कार्यक्रम होना था लेकिन दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

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पिता के अंतिम संस्कार के बाद से मुख्यमंत्री लगातार अपने गांव नेमरा में है। पिता के श्राद्धकर्म के साथ-साथ वो राजधर्म का पालन करते हुए सरकारी कामकाज को नेमरा गांव से कर रहे है। कभी अधिकारियों के साथ मीटिंग तो कभी किसानों के बीच पहुंचकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड के लोगों की सेवा और उनके समस्याओं का निपटारा करने में लगे हुए। उन्होने दिशोम गुरु के सपनों का झारखंड बनाने का संकल्प लिया है। जिस तरह से वो पुत्र धर्म और राजधर्म का पालन एक साथ कर रहे है उसकी सभी ओर सराहना हो रही है।

 

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9 अगस्त को रक्षाबंधन भी है और विश्व आदिवासी दिवस भी है। रक्षाबंधन से पूर्व झारखंड के महिलाओं के खातों में मंईयां सम्मान योजना की राशि भेजवाने के साथ-साथ उन्हे रक्षाबंधन की बधाई भी मुख्यमंत्री ने दिया। इसके बाद विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अपने दिल की बात सोशल मीडिया पर साझा करते हुए दिशोम गुरु शिबू सोरेन को एक बार फिर से याद किया और उनके सपनों का झारखंड बनाने का संकल्प एक बार फिर लेते हुए एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज विश्व आदिवासी दिवस है पर मेरे मार्गदर्शक, मेरे गुरु, मेरे बाबा सशरीर साथ नहीं हैं, मगर उनका संघर्ष, उनके विचार, उनके आदर्श हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। वह न केवल मेरे पिता थे, बल्कि समस्त आदिवासी समाज समेत झारखण्ड की आत्मा, संघर्ष के प्रतीक और जल-जंगल-जमीन के सबसे मुखर रक्षक भी थे।
यह आदिवासी समाज ही है जिसने मानवजाति को प्रकृति के साथ सांमजस्य बनाकर खुशहाल जीवन जीने का मार्ग दिखाया है। आदिवासी समाज का जीवन-दर्शन प्रकृति से ही शुरु और प्रकृति पर ही खत्म होता है। मगर सदियों से खुद आदिवासी तथा शोषित-वंचित समाज हाशिये पर खड़े रहने को मजबूर रहा। बाबा ने इसी स्थिति को बदलने के लिए अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया था।
विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य भर में होना वाला कार्यक्रम उनका प्रिय रहा। क्यूंकि यह अवसर आदिवासी समाज की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति को एक सूत्र में पिरोने का माध्यम रहा है, आदिवासी समाज की प्रतिभा को वैश्विक मंच देने का अवसर बना है।
आज पूरा विश्व आदिवासी दिवस मना रहा है। इस अवसर पर मैं बाबा दिशोम गुरु सहित हमारे सभी वीर पुरुखों को नमन करता हूँ, जिन्होंने संघर्ष और शहादत देकर हमारी पहचान, हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता और हमारे अधिकारों की रक्षा की।
विश्व आदिवासी दिवस पर मैं नमन करता हूँ अपने वीर पुरखों को, और संकल्प लेता हूं कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर झारखण्ड और देश में आदिवासी अस्मिता की मशाल को और ऊंचा करूंगा।
झारखण्ड के वीर अमर रहें!
देश के समस्त वीर आदिवासी योद्धा अमर रहें!
जय जोहार, जय आदिवासियत, जय झारखण्ड!

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