चतरा : टंडवा में एनटीपीसी परियोजना के परिसर के अंदर भीषण आग लग गई है। आग के बाद धुआं उठने से लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। आग की लपटे बढ़ने और धुआं उठने से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। टंडवा एनटीपीसी से बिजली आपूर्ति अभी तक शुरू नहीं हो सका है। अभी बिजली उत्पादन का कार्य बहुत कम मात्रा में हो रहा है लेकिन उसकी आपूर्ति बाहर नहीं हो पा रही है।
विवादों में रहा है NTPC टंडवा
एनटीपीसी टंडवा में प्रोडक्शन तो शुरू हुआ है लेकिन वहां से बाहर बिजली की सप्लाई अभी तक शुरू नहीं हो सकता है। 23 साल से ज्यादाएनटीपीसी और जमीन मालिकों के हिसाब से 2200 एकड़ में 200 एकड़ पर फिलहाल एनटीपीसी का कब्जा विवाद के कारण आधा-अधूरा है। इसमें छह गावों की जमीनें हैं, जिसमें टंडवा, नईपारम, दुंदुआ, राहम, कामता और गाड़ीलॉन्ग शामिल है। समय के बाद यहां प्रोडक्शन बहुत कम मात्रा में शुरू हुआ लेकिन हमेशा ये विवाद में रहा है। एक विवाद इसकी जमीन को लेकर भी रहा है।टंडवा प्रोजेक्ट विवाद के जड़ में इसे शुरू करने को लेकर लेट-लतीफी है। जिस प्रोजेक्ट की आधारशिला 1999 में रखी गई। उस पर निर्माण का कार्य काफी दिनों बाद शुरू हुआ। तब तक जमीन की कीमतें काफी बढ़ गई। केंद्र सरकार ने जमीन अधिग्रहण के नए नियम बना डाले।
टंडवा NTPC से झारखंड को फायदा
झारखंड की अति महात्वाकांक्षी एनटीपीसी टंडवा से बिजली उत्पादन में हाईटेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। देश में पहली बार एयर कूल कंडेन्स सिस्टम पर आधारित तकनीक से पानी की खपत महज पच्चीस फीसदी रह जाएगी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से झारखंड ही नहीं बल्कि देश के कई राज्य भी जगमग होंगे। झारखंड के अलावा बिहार, ओडिशा, बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बिजली की सप्लाई की जाएगी। इस परियोजना से 1980 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। इसमें से करीब 500 मेगावाट बिजली की खपत झारखंड में होगी। काफी कम दर पर बिजली का उत्पादन यहां से हो सकेगा क्योंकि सीसीएल की मगध कोल परियोजना महज चंद किलोमीटर की दूरी पर है।


