न मैदान, न स्पोर्ट टीचर; जमशेदपुर के स्कूलों में बांट दिया करोड़ों का खेल का सामान

Picture of Live Dainik

Live Dainik

October 16, 2025

School_play_ground

जमशेदपुरः नई शिक्षा नीति में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल को विशेष महत्व दिया गया है। सरकार पढ़ाई के साथ खेल को भी प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधा का अभाव इस दिशा में बड़ी बाधा बन गया है। विद्यार्थियों में स्पोर्ट्स स्किल निखारने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। करोड़ों की लागत से स्पोर्ट्स किट स्कूलों में बांटी गई हैं, मगर उनका उपयोग नहीं हो पा रहा। स्कूलों में न तो खेल का मैदान है, न ही खेल शिक्षक।

इस बार झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने सीधे स्कूलों को किट उपलब्ध कराई है, लेकिन बिना मैदान वाले इन स्कूलों में यह सामग्री बिना उपयोग के पड़ी है। कई स्कूलों में मैदान तो है, लेकिन बाउंड्री वॉल नहीं होने से वहां सामाजिक तत्वों का जमावड़ा और अतिक्रमण हो चुका है।

झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन में 30 करोड़ का घोटाला!, मंत्री ने दिए जांच के आदेश

See also  JSSC CGL पेपर लीक मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा-'ऐसा लग रहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही हैं'

ऐसे में खेल प्रतिभाओं के निकलने की उम्मीद व्यर्थ हो जाती है। पूर्वी सिंहभूम के 1597 स्कूलों में से 856 के पास खेल मैदान नहीं है। इनमें प्राथमिक विद्यालयों की संख्या सबसे अधिक है। जब मैदान ही नहीं होंगे तो खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे।

शहरी क्षेत्र के अधिकांश स्कूलों में खेल मैदान के लिए जगह ही नहीं है। सीतारामडेरा आदिवासी प्लस टू स्कूल (आदर्श विद्यालय) के पास आधा एकड़ जमीन है, लेकिन 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर भवन बन चुका है। इसी तरह राजकीयकृत जुगसलाई कन्या उच्च विद्यालय में भी मैदान नहीं है।

यहां छात्राएं एसेंबली में कॉरिडोर में जुटती हैं। अपग्रेड गवर्नमेंट हाई स्कूल लक्ष्मीनगर और हरिजन मवि भालूबासा के पास भी मैदान नहीं है। इंडोर गेम्स तो छात्र खेल लेते हैं, लेकिन आउटडोर गेम्स में दिक्कत आती है।

हजारीबाग वन भूमि घोटाले में ACB का बड़ा एक्शन, पूर्व CO शैलेश कुमार गिरफ्तार

राजकीय उच्च विद्यालय बिरसानगर जिला स्कूल में मैदान तो है, लेकिन सामाजिक तत्वों और अतिक्रमण के कारण उसका उपयोग नहीं हो पाता। बाराद्वारी देव नगर प्राथमिक विद्यालय और उर्दू मध्य विद्यालय मांगो जैसे सैकड़ों विद्यालयों में खेलने की न तो जगह है और न ही स्पोर्ट्स टीचर।

See also  Viral Video: ‘दो हिट में मार डालूंगी’: छोटी बच्ची ने AK-47 लेकर पीएम मोदी को दी धमकी, वीडियो वायरल

अब तक स्कूलों को स्पोर्ट्स किट खरीदने के लिए 5 से 10 हजार रुपये तक की राशि दी जाती थी। सत्र 2025-26 में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने राज्य से ही सीधे जिलों के स्कूलों में स्पोर्ट्स किट भेजी है।

बीजेपी ने जारी कर दी सभी उम्मीदवारों की सूची, तेजस्वी यादव के खिलाफ इन्हें राघोपुर से उतारा

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now