रांचीः झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान में जुटे सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। एक करोड़ रुपये का इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा को गिरिडीह जिले से गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ रीजनल कमेटी सदस्य 15 लाख के इनामी नक्सली मेहनत उर्फ मोछू और गौरव उर्फ सौरव भी पकड़ा गया है। भास्कर, सुनीर्मल, प्रधान जी और सागर जैसे कई नामों से पहचान रखने वाले मिसिर बेसरा के खिलाफ 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना रहा।
1960 में गिरिडीह जिले के मदनाडीह गांव में जन्मे मिसिर बेसरा ने प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूरी की। इसके बाद वह धनबाद चला गया, जहां उच्च शिक्षा के दौरान वह वामपंथी और उग्र विचारधारा से प्रभावित हुआ। धनबाद के राजगंज में राजनीति विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई के दौरान झारखंड आंदोलन अपने उफान पर था। इसी दौर में उसने माओवादी विचारधारा को अपनाया।
युवावस्था में ही उसने मोनासी देवी से विवाह किया। उनका एक पुत्र सिद्धार्थ है, जो आज दिहाड़ी मजदूर के रूप में जीवनयापन करता है। 1980 के दशक में मिसिर बेसरा घर छोड़कर माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) में शामिल हो गया। बाद में एमसीसी का पीपुल्स वॉर ग्रुप के साथ विलय हुआ और संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के रूप में सामने आया। उसके घर छोड़ने के कुछ वर्षों बाद उसकी पत्नी ने दूसरी शादी कर ली।बेटे सिद्धार्थ के अनुसार, “जब मैं करीब पांच साल का था, तब पिता दो-तीन बार घर आए थे। उसके बाद मैंने उन्हें फिर कभी नहीं देखा।” एक परिवार से दूर होता व्यक्ति धीरे-धीरे संगठन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गया।
झारखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 के आसपास मिसिर बेसरा ने सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमलों की रणनीति बनाई। वर्ष 2003 और 2004 में पश्चिम सिंहभूम के बिटकिलसोय और बलिबा में हुए आईईडी हमलों में 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। इन हमलों ने उसे माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व में पहुंचा दिया। उसे केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) में पदोन्नति मिली और 2004 में एमसीसी व पीडब्ल्यूजी के विलय के बाद वह संगठन के पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो का प्रमुख बना।
उसने शीर्ष माओवादी नेता गणपति (मुप्पला लक्ष्मण राव) के साथ मिलकर झारखंड में संगठन का प्रभाव तेजी से बढ़ाया और कई वर्षों तक राज्य के बड़े हिस्से में माओवादी नेटवर्क को मजबूत किया।
मिसिर बेसरा का नाम वर्ष 2009 के चर्चित लखीसराय जेलब्रेक कांड से भी जुड़ा रहा। जून 2009 में बिहार के लखीसराय में अदालत में पेशी के दौरान करीब 30 हथियारबंद माओवादी मोटरसाइकिलों से पहुंचे और हमला कर उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा ले गए। उस समय यह घटना देश की सबसे बड़ी और साहसिक माओवादी कार्रवाई मानी गई थी, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।दशकों तक जंगलों में सक्रिय रहकर सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती देने वाला मिसिर बेसरा आज भी भारत के माओवादी आंदोलन के सबसे चर्चित चेहरों में गिना जाता है। उसके जीवन की कहानी यह भी दिखाती है कि एक साधारण छात्र कैसे कट्टर उग्रवाद की राह पर चलते हुए देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल हो गया।


