JPSC भर्ती घोटालाः तबादले के बाद भी श्वेता गुप्ता को 15 दिन के लिए आयोग में बुलाया गया, फिर हुई गड़बड़ी

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September 27, 2026

JPSC भर्ती घोटालाः तबादले के बाद भी श्वेता गुप्ता को 15 दिन के लिए आयोग में बुलाया गया, फिर हुई गड़बड़ी

RANCHI: जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली मामले में अब प्रशासनिक मिलीभगत का बड़ा खुलासा हुआ है। सीआईडी ने कोर्ट को सौंपे दस्तावेज में कहा है कि जेपीएससी की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता का तबादला होने और उनके नए विभाग में पदभार संभालने के बावजूद उन्हें 15 दिन के लिए फिर से आयोग में ज्वाइन कराया। इस 15 दिन के सेवा विस्तार के दौरान परीक्षा से जुड़े सबसे गोपनीय दस्तावेज और ओएमआर-ओएसएम की कस्टडी उन्हीं के पास रखी गई।

सीआईडी ने कहा है कि श्वेता को आयोग में बनाए रखने के लिए नियमों को दरकिनार कर तत्कालीन चेयरमैन एल ख्यांगते के निर्देश पर पत्राचार किया गया। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की अधिसूचना संख्या 3280 के तहत श्वेता का ट्रांसफर खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग में कर दिया गया था। इसका आदेश 22 मई 2026 को जारी हुआ। तबादले के बाद उन्होंने नए विभाग में कार्यभार संभाल लिया। इसी दौरान 25 जून को पत्र संख्या 4245 जारी हुआ, जिसमें श्वेता और एक अन्य अधिकारी सरोजिनी अनी तिर्की को 15 दिन के लिए दोबारा जेपीएससी में उसी पद पर योगदान करने का निर्देश दिया। इसके बाद श्वेता ने इस विशेष पत्र (संख्या 4245) का हवाला देकर खुद को आयोग के काम में व्यस्त कर लिया। सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी, ताकि डेटा प्रोसेसिंग और ओएमआर की हेराफेरी के दौरान पूरी कमान श्वेता गुप्ता के पास रहे।

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सीआईडी की केस डायरी में ऐसे गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने बताया है कि टीडीपीएल और जेपीएससी से जुड़े लोग ओएमआर शीट्स में हेरफेर कर रहे थे। जब जेपीएससी में इस तरह की गंभीर अनियमितताएं चल रही थीं, तब श्वेता गुप्ता अपने तबादले के बावजूद आयोग के अध्यक्ष के निर्देश पर लगातार परीक्षा संबंधी गोपनीय कार्यों का निष्पादन कर रही थी। जांच के दौरान पूरी परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर करने में एजेंसी टीडीपीएल के साथ आयोग के शीर्ष स्तर की सीधी संलिप्तता थी, जो सीआईडी की जांच में अब उजागर हो चुकी है।

टीडीपीएल ने श्वेता व उनके परिजनों के लिए बुक कराया था एयर टिकट

सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि उप परीक्षा नियंत्रक का यह सेवा विस्तार केवल प्रशासनिक आदेशों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे निजी एजेंसी से सीधे उपकृत होने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। टीडीपीएल के निदेशकों सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह के निर्देश पर सह-अभियुक्तों ने श्वेता कुमारी गुप्ता और उनके परिवार के सदस्यों के लिए हवाई टिकटों की व्यवस्था की थी। सीआईडी ने इसके टिकट रिकॉर्ड, पीएनआर, पैसेंजर लिस्ट, बुकिंग का समय, भुगतान के डिजिटल ट्रेल और यात्रा संबंधी संचार के पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज जब्त कर अदालत के समक्ष रखे हैं।

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सीजीएल…फूड इंस्पेक्टर संजय सहित तीन और सफल अभ्यर्थी गिरफ्तार, अब तक 36 गिरफ्तारी

जेएसएससी की सीजीएल प्रतियोगिता परीक्षा में धांधली की जांच कर रही सीआईडी ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और सफल अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें गिरिडीह के पिहरा गांवा निवासी संजय कुमार, धनवार निवासी रामाकृष्णा कुमार सिंह और कोडरमा के सतगांवा निवासी अजय कुमार शामिल हैं। संजय कुमार फूड इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत है। वहीं अजय कुमार स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग में कनीय सचिवालय सहायक है। आरोप है कि इन तीनों ने सिंडिकेट और सेटरों के साथ साठगांठ कर परीक्षा में अनुचित लाभ हासिल किया था और मेरिट लिस्ट में जगह बनाई थी। जांच के दौरान पुख्ता सबूत मिलने के बाद सीआईडी ने इनकी गिरफ्तारी की। इसके साथ ही इस मामले में अब 36 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

फॉरेंसिक स्क्रूटनी जारी, रडार पर हैं सीजीएल के कई सफल अभ्यर्थी

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परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के डेटा, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और बैंक खातों के लेन-देन की फॉरेंसिक स्क्रूटनी लगातार जारी है। जिस तरह से एजेंसी एक-एक कर संदिग्ध अभ्यर्थियों की छंटनी कर रही है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में कई और सफल अभ्यर्थी सलाखों के पीछे होंगे। जांच में यह भी सामने आ रहा है कि परीक्षा पास कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 से 25 लाख रुपये तक का सौदा हुआ था। सीआईडी की टीम अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिनके जरिए यह सिंडिकेट जाल बुन रहा था।

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