रांचीः शुक्रवार को सरकार से जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के प्रतिनिधियों की बातचीत बेनतीजा समाप्त होने के बाद शनिवार को दूसरे गुट यानी जेपीएससी-जेएसएसी अभ्यर्थी न्याय मंच को सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया। पहले गुट से बातचीत फेल होने के बाद दूसरे गुट को बातचीत के लिए बुलाये जाने के बाद पहला गुट नाराज हो गया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए किसी भी राजनीति दल के नेता को अपने मंच पर जगह नहीं देने का फैसला किया है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा है कि सरकार हमें छात्र संगठन में बाट रही है जब हमारी मांगे एक है ” रद्द मतलब रद्द ” फिर क्या सुझाव सुझाव खेल रही है सरकार ?
सभी छात्र देख सकते है सरकार का चाल चरित्र चेहरा , ये तो किसी राजनैतिक पार्टी से संबंधित लोगों से नहीं मिलना चाहते थे न ????
हमारे आंदोलन को राजनैतिक बता रहे थे अभी ये क्या कर रहे है ?
स्टेडियम में AISA का एक अलग ग्रुप बैठ गया है
पहले से एक JLKM बैठा हुआ है
अच्छा चाल खेल रही है सरकार अब कोई लब्बी डब्बी नहीं होगा।
अब उलगुलान होगा। pic.twitter.com/mtOBJFKvnq
— JPSC JSSC REFORM MANCH (@JPSCreformanch) August 8, 2026
अब कोई राजनैतिक पार्टी के आदमी को घुसने नहीं देना है अब उलगुलान होगा।…— JPSC JSSC REFORM MANCH (@JPSCreformanch) August 8, 2026
छात्रों को बेवकूफ समझने की भूल न करे। आप NSUI , JCM फलना धीमकना को बुला रहे है क्या ये किसी राजनैतिक पृष्ठभूमि से नहीं आते है ? अभी आपको छात्र टूलकिट नज़र नहीं आ रहे है?जितना दिमाग छात्रों को गुटो में तोड़ना में लगा रहे है उतना हमारी मांगे पे विचार किए होते तो सैकड़ों छात्रों का भला होता। 10 तारीख को विधानसभा घेराव करके बता देंगे कि हम सब एक है। सरकार चाहती तो हमारी मांगे चुप चाप मान सकती थी। पर नहीं इन्हें दिमाग लगाकर छात्र आंदोलन को गुटो में तोड़ना है। हमें एक रहना है और 10 तारीख को अपना संख्याबल के साथ रांची कूच करना है। पढ़ने वाले छात्र टेंट के नीचे बैठे है और ये कॉलेज के छात्र संगठन को बुलाएंगे। यहाँ कुछ राजनीतिक पार्टी ऊपर से सरकार के खिलाफ दिखती है और अंदर से छात्रों के खिलाफ सरकार के साथ मिल के आंदोलन को तोड़ रही है। हमें झांसे में नहीं आना है और एक रहना है।
सरकार की पांच सदस्यीय टीम ने शनिवार को सबसे पहले देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल से करीब दो घंटे बातचीत की।इसके बाद सरकार ने कांग्रेस समर्थित NSUI, ACS और JCM के प्रतिनिधिमंडलों से भी चर्चा की। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का यह दूसरा दौर था। इससे पहले शुक्रवार रात 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से वार्ता हुई थी।
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आंदोलन का नेतृत्व कर रहे देवेंद्र नाथ महतो का अनशन शनिवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गया। उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनके मुताबिक, उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लगातार गिर रहा है। डॉक्टरों ने चेस्ट इंफेक्शन की बात कहते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी है।उन्होंने कहा कि छात्र पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार को अब मांगों पर जल्द फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शुक्रवार की बैठक में ही मांगों पर निर्णय हो जाता तो शनिवार को दोबारा बैठक की जरूरत नहीं पड़ती।
सभी प्रतिनिधियों से बात कर मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे मांगें
उम्मीदवारों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बताया कि आज छात्र आंदोलन के सभी हितधारकों से मिलकर उनकी भावनाओं को समझना चाहते थे। इसी संबंध में NSUI का एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों, अपने सुझावों को लेकर उनसे मिला।
सुदिव्य कुमार ने कहा कि हम लोगों ने भी उनके सुझावों का बड़ी गंभीरता से अध्ययन किया। इस प्रतिनिधिमंडल की मांगें बहुत जायज प्रतीत होती हैं। हम लोग भी ये समझते हैं कि मुख्यमंत्री के सामने जब ये मांगें रखी जाएंगी तो इस संबंध में मुख्यमंत्री का बहुत सकारात्मक जवाब आएगा।
कांग्रेस ने उठाई 5 मांगें
रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा ने कहा, "सरकार को इस पहल के लिए धन्यवाद। जितने भी हितधारक थे, जिन लोगों की भागीदारी इस आंदोलन में थी, उन सभी से सरकार मुलाकात कर रही है।NSUI ने अपने पूरा मांग पत्र सौंपा है, जिसे छात्रों से बात करके, उनकी भावनाओं को ध्यान में रख कर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि तत्काल प्रभाव से 14वीं JPSC को रद किया जाए। जितनी भी संदिग्ध परीक्षाएं हुई हैं, CID-SIT के माध्यम से 90 दिनों के अंदर जांच की जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने कहा कि परीक्षाओं को पारदर्शी बनाया जाए। हमारी एक मांग ये भी है कि परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर हो। इसके अलावा एक सुझाव दिया गया है कि सरकार परीक्षा कराने की जिम्मेदारी एजेंसियों को देने की बजाय, खुद से पूरा प्रक्रिया को करे।







