सुदेश महतो के ‘सौदेबाजी’ वाले बयान पर JMM का पलटवार, कहा-खत्म हो चुका है AJSU का जनाधार, हेमंत है सबसे बड़े नेता

सुदेश महतो के 'सौदेबाजी' वाले बयान पर JMM का पलटवार, कहा-खत्म हो चुका है AJSU का जनाधार, हेमंत है सबसे बड़े नेता

रांचीः रविवार को आजसू पार्टी ने बलिदान दिवस के रूप में अपनी स्थापना दिवस कार्यक्रम मनाया। इस मौके पर पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश महतो ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस दोनों पर हमला बोला। सुदेश महतो ने कहा कि झारखंड राज्य के लिए आजसू पार्टी ने संघर्ष किया, बाकी ने सिर्फ सौदेबाजी की है। सुदेश ने आगे कहा कि प्रखंड स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है, सिस्टम में डकैती हो रही है और जनता त्रस्त है।

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उन्होंने कहा कि सारा तंत्र काम में अड़ंगा लगाकर तथा डरा-धमकाकर लूट में लगा है, जमीन की भी लूट मची है। इन सभी के विरुद्ध लड़ाई लड़ने के लिए आजसू तैयार है। उन्होंने इसके लिए कार्यकर्ताओं से संघर्ष करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि वोट के लिए उन छह लाख महिलाओं के खाते में पैसे बांटे गए जो इसके लिए योग्य नहीं थे। सवाल उठाया कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार झूठ बोलकर और गुमराह कर राजनीति कर रही है।उन्होंने कहा कि चुनावी घोषणा के बाद भी न तो नियोजन नीति बनी, न ही स्थानीय और विस्थापन नीति। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली पर कांग्रेस सिर्फ राजनीति कर रही है, जबकि इस पार्टी ने ही परंपरागत स्वशासन व्यवस्था को खत्म किया था।

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सुदेश के बयान पर जेएमएम ने सोमवार को पलटवार किया। पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडे ने सुदेश महतो पर हमला करते हुए कहा कि आजसू का अब झारखंड में जनाधार खत्म हो चुका है। राज्य में ओबीसी का आरक्षण 24 प्रतिशत से घटकर 14 प्रतिशत हुआ इसके लिए आजसू जिम्मेदार है। हेमंत सोरेन ने ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत करने की पहल की थी। हेमंत सोरेन अपने स्पष्ट नीतियों की वजह से देश के सबसे बड़े आदिवासी नेता बन गए है।
सुदेश महतो के बयान का जवाब देते हुए विनोद कुमार पांडे ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि आरक्षण और स्थानीय नीति पर आजसू की राजनीति दोहरी और अवसरवादी..

◆ पूरी तरह राजनीतिक प्रपंच और जनता को गुमराह करने की साजिश है। आजसू पार्टी झारखंड में ओबीसी आरक्षण को 24 से घटकर 14 प्रतिशत करने के लिए जिम्मेदार है, वह आज आरक्षण पर नैतिकता की दुहाई दे रही है, यह झारखंड की जनता के साथ एक भद्दा मजाक है। आजसू पार्टी अपनी ऐसी दिशाहीन नीतियों के कारण आज जनता के बीच अपना जनाधार खो चुकी है। पिछले चुनावों के परिणाम पर गौर करें तो ये साफ नजर आता है कि आजसू पार्टी का अब कोई जनाधार नहीं बचा है।

◆ OBC आरक्षण में कटौती में आजसू की भूमिका, जब झारखंड की लोकप्रिय हेमंत सरकार ने ओबीसी को 27% आरक्षण देने की पहल की थी, तब न्यायालय में जाकर इसे रोकने की कोशिश NDA गठबंधन के सहयोग से हुई थी। आजसू पार्टी NDA का महत्वपूर्ण घटक दल है। आजसू पार्टी को पहले यह बताना चाहिए कि ओबीसी आरक्षण पर उसका स्टैंड क्या है? अगर वह ओबीसी के हक में है, तो पहले यह स्पष्ट करे कि अदालत में आरक्षण रोकने वालों के साथ वह क्यों खड़ी थी ? और आजसू के साथ गठबंधन वाली बाबूलाल मरांडी की सरकार में ओबीसी आरक्षण घटाया गया था, तब आजसू पार्टी सहमत क्यों थी। आजसू पार्टी अपने इतिहास के इस कलंक को कभी नहीं मिटा सकती।

◆ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी स्पष्ट नीतियों के कारण आज देश के सबसे बड़े आदिवासी नेता यूं ही नहीं बन गए हैं – उनके कार्यों से, नीतियों से, निर्णयों से, योजनाओं से समाज का हर वर्ग लाभान्वित है, खुश है। माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुकाबला करने के लिए सबसे पहले जरूरी है उनके जैसा उदार और संवेदनशील बनना। आरक्षण पर सवाल उठाने से पहले आत्ममंथन करे आजसू , आजसू पार्टी निजी क्षेत्र में 75% आरक्षण पर सवाल उठा रही है। आरक्षण को लेकर कोर्ट में बाधाएं खड़ी करने वाले कौन लोग हैं, यह सबको पता है। सरकार नीतियां बना रही है, कोर्ट की प्रक्रिया का सम्मान कर रही है, लेकिन आजसू जैसे दल युवाओं की भावनाओं से खेलने का काम कर रहे हैं। आजसू के पास नहीं है नीति, सिर्फ विरोध की राजनीति, आजसू पार्टी न तो राज्य की स्थानीय नीति पर कोई ठोस प्रस्ताव लेकर आई, और न ही अपनी सरकारों के दौरान नियोजन को पारदर्शी बना सकी। आज जब झारखंड सरकार नियोजन नीति को कानूनी और संवैधानिक तरीके से लागू करने में लगी है, तब आजसू केवल शोर-शराबा करके सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहती है।

◆ जनता के साथ धोखा है ‘नौकरी दो’ जैसा नारा देने से पहले आजसू यह बताए कि उनकी सरकारों के दौरान युवाओं को कितनी नौकरी मिली थी ? उन्होंने कितनी परीक्षाएं करवाई थीं ? कितनी नियुक्तियां दी थीं ? आज जब हेमंत सरकार ने हजारों पदों पर नियुक्तियां शुरू की हैं, परीक्षा आयोगों को पुनर्स्थापित किया है, पारदर्शिता लाई है, तब विपक्ष में बैठी आजसू पार्टी को यह सब दिखाई नहीं दे रहा। संवेदनशील योजनाओं का मखौल न उड़ाए, हम मईया सम्मान योजना को लेकर आजसू के आरोपों को भी खारिज करते हैं। यह योजना लाखों गरीब महिलाओं को सम्मान देने के लिए लाई गई है। कुछ नामों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता को भ्रमित करने की कोशिश आजसू बंद करे। जिन मुद्दों पर वह खुद दोषी रही है, उन पर आज भाषण देना उसका असली चेहरा उजागर करता है।

◆ झारखंड मुक्ति मोर्चा झारखंडी जनता के अधिकार, सम्मान और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। राजनीतिक स्वार्थ के लिए युवाओं और महिलाओं की भावनाओं से खेलने वालों को जनता अब जवाब देगी।

 

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