डेस्कः झारखंड में पिछले दो-तीन दिनों से हो रही लगातार बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त है। सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां और राजमहल में घर ध्वस्त हो गये. खरसावां में एक घर धंस गया। जिसकी वजह से 5 साल की बच्ची की मौत हो गयी। उधर, खूंटी जिले में भारी बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं।
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खूंटी में कांची नदी के उफान पर होने से रंगरोड़ी धाम पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जो जनजातीय समुदायों का प्रमुख आस्था केंद्र है। इस धाम का मुख्य मंदिर पानी में डूब गया है और आसपास के खेतों में धान की फसल बर्बाद हो रही है। नदी के तेज बहाव के कारण खेत भी नदी का रूप ले चुके हैं और किसान अपनी फसल बचाने में असमर्थ हैं।मुरिह पंचायत स्थित कांची नदी किनारे बने रंगरोड़ी धाम पूरी तरह जलमग्न हो गया है। मंदिर का मुख्य द्वार पूरी तरह डूब गया है। वहीं तजना नदी और कोबरा बटालियन स्थित जोड़ा पुल में पानी का बहाव तेज हो गया है। अड़की प्रखंड के आसपास के इलाकों में जलजमाव से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। साथ ही कई कच्चे मकान ध्वस्त हो गए हैं।
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अत्यंत नक्सल प्रभावित सारंडा जंगल में भारी बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। हतनाबुरू और मारागपोंगा गांव के बीच मुख्य ग्रामीण सड़क पर पहाड़ की मिट्टी धंसकर आ गिरी। यह वही सड़क है, जो दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ती है और सारंडा के लोगों के जीवन की धड़कन मानी जाती है, लेकिन अब वहां सिर्फ कीचड़, पत्थर और मलबा पसरा है।
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शनिवार को छोटानागरा में साप्ताहिक हाट बाजार लगता है। यह वही बाजार है जहां सारंडा के लोग अपने खेतों की सब्जियां, जंगल का महुआ, साल पत्ता, तसर और लकड़ी बेचकर चूल्हा जलाने के लिए पैसा जुटाते हैं, लेकिन सड़क बंद होते ही यह धंधा चौपट हो सकता है।
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एक किसान नाथु बहंदा ने रोष जताते हुए कहा हमारा पेट पर वार कर दिया यह वर्षा। जब रास्ता ही बंद, तो बाजार कैसे पहुचेंगें। सड़क ठप होने से बच्चे अब स्कूल नहीं पहुंच सकते। बारिश से पहले जहां किसी तरह साइकिल या पैदल बच्चे स्कूल जाते थे, वहीं अब उनके कदम गांव की गलियों तक सीमित हो गए हैं। मरीजों के लिए तो यह और भी खतरनाक स्थिति है।



