झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की ट्रेन हो गई लेट, 35 किलोमीटर का सफर 2 घंटे में किया तय

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की ट्रेन हो गई लेट, 35 किलोमीटर का सफर 2 घंटे में किया तय

रांचीः झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार जिस ट्रेन में सफर कर रहे थे वो ट्रेन करीब दो घंटे लेट अपने गणतव्य पर पहुंची। राज्यपाल जैसे विशिष्ठ व्यक्ति जिस ट्रेन में सफर कर रहा हो वो इतना विलंब हो जाए ये विडंबना ही लगती है। राज्य के प्रथम नागरिक या यू कहे कि सबसे वीआईपी यात्री की ट्रेन इतनी लेट हो जाए तो ये चर्चा का विषय बन जाती है।

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दरअसल, राज्यपाल संतोष गंगवार 2 जून को पटना से चलकर 3 जून को जमशेदपुर पहुंचे। जहां उन्हे एक अरका जैन विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में शामिल होना था। आरा से दुर्ग तक जाने वाली 13288 दक्षिण बिहार एक्सप्रेस से राज्यपाल ने पटना से टाटा का सफर किया। इस दौरान टाटा ट्रेन करीब एक घंटे देरी से पहुंची। लेकिन ताज्जुब की बात है कि जो ट्रेन सुबह 6.41 मिनट पर चांडिल पहुंच गई थी वो टाटा 8.29 मिनट पर पहुंची, यानी कि उसे 35 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब 2 घंटे का समय लगा। हालांकि ट्रेन अपने नीयत समय से 54 मिनट की देरी से टाटा पहुंची।

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राज्यपाल से गरिमामय पद और उच्च विशिष्ठ पद पर बैठा शख्स जिस ट्रेन में सफर कर रहा हो वो भी इतनी लेटलतीफी से चले तो चर्चा और विवाद दोनों खड़े हो जाते है। झारखंड रेल यूजर नाम के एक सोशल मीडिया अकाउंट होल्डर ने इस पूरे मामले पर रेलवे के रवैये पर सवाल उठाया है। उसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट किया और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री-राज्यपाल और रेलवे के अधिकारियों को टैग करते हुए लिखा है कि #झारखंड के राज्यपाल हुए @serailwaykol के कुप्रबंधन और ट्रेन के लेट लतीफी का शिकार।#झारखंड के राज्यपाल @jhar_governor जब 13288 #आरा #दुर्ग #दक्षिण_बिहार एक्सप्रेस से #पटना से #टाटा की यात्रा कर रहे थे, तब @ADRARAIL और @CkpDrm ने #चांडिल से #टाटा के बीच महज 35 किमी की दूरी तय करने में ट्रेन को करीब 2 घंटे लगवा दिया। जब VIP भी इस लापरवाही के शिकार हो रहे हैं, तो आम जनता की हालत का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है। हर दिन ट्रेनों की देरी एक आम समस्या बन चुकी है, लेकिन इसे ठीक करने की किसी को फिक्र नहीं है। आखिर कब जागेगा रेलवे प्रशासन?

 

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