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JDU को अग्निवीर और UCC पर एतराज, एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर BJP के साथ

नीतीश कुमार को मोदी सरकार से झटका, बिहार को नहीं मिलेगा विशेष राज्य का दर्जा, JDU सांसद के सवाल पर वित्त राज्य मंत्री का जवाब

पटना: केंद्र में एनडीए की सरकार बनाने की तैयारी चल रही है। बुधवार को एनडीए की बैठक में नरेंद्र मोदी को नेता चुना गया। जेडीयू और टीडीपी की इस सरकार में अहम भूमिका होने जा रही है। दोनों ही पार्टियां सरकार में शामिल होंगी या नहीं इसको लेकर अभी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा रहा है। जेडीयू शुक्रवार को बैठक कर सरकार में शामिल होने को लेकर कोई फैसला करेगी।

माना जा रहा है कि जेडीयू मोदी 3.0 सरकार में जेडीयू तीन मंत्री पद चाह रही है। इसके साथ ही जेडीयू को मोदी की पिछली सरकार के कुछ फैसलों पर भी एतराज है। जेडीयू अग्निवीर योजना और यूसीसी के मुद्दे पर सरकार से सहमत नहीं है वो चाहती है कि एनडीए की सरकार में इसपर विचार हो, हालांकि वो एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर जरूर मोदी सरकार के साथ है।जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा है कि हम एनडीए के मजबूत हिस्सेदार के रूप में सामने आये है। उन्होने कहा कि ‘अग्निवीर योजना को लेकर के बहुत विरोध हुआ था और चुनाव में भी उसका असर देखने को मिला है, इस पर दोबारा से विचार करने की जरूरत है। अग्निवीर योजना को नए तरीके से सोचने की आवश्यकता है ।जो सुरक्षाकर्मी थे सेना में तैनात थे और जब भी अग्निवीर योजना आई तो बड़े तबके में असंतोष था। मेरा ऐसा मानना है कि उनके परिवार जनों ने भी चुनाव में विरोध जारी किया इसलिए आज इसमें नए तरीके से विचार विमर्श की जरूरत है।’

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Nitish को चाहिए Modi 3.0 सरकार में तीन मंत्री का पद, जानिये कौन है दौड़ में आगे

नीतीश कुमार इस सरकार में तीन मंत्री का पद चाहते है। मोदी 2.0 के कार्यकाल में भी नीतीश कुमार की यही डिमांड थी, लेकिन तत्कालीन जेडीयू अध्यक्ष आरसीपी सिंह सबको पीछे छोड़ते हुए मोदी कैबिनेट में शामिल हो गए। इसका खामियाजा आरसपी को उठाना पड़ा, पहले पार्टी अध्यक्ष पद ले लिया गया और बाद में राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हे फिर से राज्यसभा नहीं भेजा गया। उनकी जगह झारखंड से खीरू महतो को राज्यसभा जेडीयू ने भेज दिया। नाराज आरसीपी ने जेडीयू छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ले ली।
समय का चक्र बदला अब जेडीयू एनडीए की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और माना जा रहा है कि सरकार की एक चाभी नीतीश के पास ही है, जिसपर विपक्ष लगातार डोरे डाल रहा है। इस बार नीतीश तीन मंत्री का पद चाहते है, इसमें दो कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का पद। पहले चर्चा थी कि वो लोकसभा अध्यक्ष का पद भी चाहते है लेकिन अब उनको लोकसभा अध्यक्ष बीजेपी का होने में कोई एतराज नहीं है क्योकि राज्यसभा में उपसभापति का पद अभी जेडीयू के पास है। जेडीयू के हरिवंश अभी राज्यसभा में उपसभापति है। जेडीयू की ओर से मंत्री पद के कई दावेदार है लेकिन जातीय समीकरण को बैठाकर नीतीश केंद्र में मंत्री पद चाहते है। नीतीश के करीबी रहे ललन सिंह और संजय झा कैबिनेट में शामिल होने के प्रबल दावेदार है। वही दिलेश्वर कामत और रामनाथ ठाकुर को भी मंत्री पद का बड़ा दावेदार माना जा रहा है। नीतीश केंद्र में अपने सबसे करीबी लोगों को ही मंत्री बनाने चाहते है ताकि केंद्र का ज्यादा से ज्यादा फंड बिहार आ सके। माना जा रहा है कि ललन सिंह और संजय झा दोनों कैबिनेट में मंत्री बन सकते है और राज्यसभा सांसद और कर्पूरी ठाकुर के बेटे रामनाथ ठाकुर या सुपौल से सांसद दिलेश्वर कामत राज्यमंत्री बन सकते है। पिछले मोदी सरकार में भी ललन सिंह मंत्री बनना चाहते थे लेकिन आरसीपी सिंह के चाल के आगे उन्हे मात खानी पड़ी।

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