DESK: झारखंड के चाईबासा क्षेत्र में अवैध लौह अयस्क खनन का मामला लगातार गहराता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यहां से बड़े पैमाने पर अवैध रूप से निकाला गया आयरन गिरिडीह, चंदनक्यारी ह,पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर तक भेजा जाता है। अगर इस पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि अवैध खनन और परिवहन का यह खेल लंबे समय से जारी है। इस पूरे नेटवर्क के पीछे सन्नी सिंह को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जो कथित तौर पर पूरे सिंडिकेट को संचालित कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में इस नाम की चर्चा तेज है। झारखंड मुक्ति मोर्चा की एक प्रेस विज्ञप्ति में भी इस नाम का उल्लेख सामने आया है।

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जानकारी के मुताबिक, यह अवैध कारोबार पहले छोटे स्तर पर शुरू हुआ था, लेकिन अब यह एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। शुरुआत में मजदूरों के जरिए डोको में खनिज निकालकर इकट्ठा किया जाता है, जिसके बाद इसे गुप्त रास्तों के माध्यम से बाहर भेज दिया जाता है।ग्रामीणों का आरोप है कि खनन गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस कारण न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।

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सूत्रों के अनुसार, प्रतिदिन करीब 10 हजार टन से अधिक लौह अयस्क की अवैध निकासी और ढुलाई की जा रही है, जो इस पूरे कारोबार के बड़े पैमाने को दर्शाता है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए साफ है कि खनन माफिया प्रशासनिक कार्रवाई के डर से पूरी तरह बेखौफ नजर आ रहे हैं।


