लोहरदगा : सामाजिक कार्यकर्ता सूरज अग्रवाल ने हिंडाल्को प्रबंधन पर स्थानीय युवाओं और कर्मचारियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि जिले के प्राकृतिक संसाधनों से हिंडाल्को कंपनी करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा रही है, लेकिन रोजगार और पदोन्नति के मामले में स्थानीय लोगों को अपेक्षित अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए व्यापक जांच की मांग की है।
स्थानीय नीति की बात करने वाले करें वास्तविक स्थिति की जांच
सूरज अग्रवाल ने कहा कि राज्य में स्थानीय एवं डोमिसाइल नीति की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों को हिंडाल्को कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति का सर्वेक्षण कराना चाहिए। उनका आरोप है कि हिंडाल्को कंपनी में चतुर्थवर्गीय स्तर पर कुछ स्थानीय लोग कार्यरत हैं, जबकि तृतीय एवं द्वितीय श्रेणी के पदों पर बाहरी राज्यों के लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि कई स्थानीय कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं मिलने और कार्यस्थल पर प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी है। इससे स्थानीय युवाओं और कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
ठेका कार्यों में भी स्थानीय की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग
सूरज अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पहले जिन कार्यों में स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों को अवसर मिलता था, अब उनमें बाहरी एजेंसियों और ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि खनन और रेजिंग कार्यों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें।
जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग
सूरज अग्रवाल ने कहा कि लोहरदगा की खनिज संपदा पर पहला अधिकार यहां के लोगों का है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को कंपनी प्रबंधन के साथ इस विषय पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए और स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पहल करनी चाहिए।
हिंडाल्को कंपनी के कार्य की प्रशासन से जांच की मांग
सूरज अग्रवाल ने प्रशासन से मांग किया है कि हिंडाल्को कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों, अधिकारियों और ठेका एजेंसियों की नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार और पदोन्नति के अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों ने विकास और रोजगार की उम्मीद के साथ अपनी जमीनें उद्योगों को उपलब्ध कराई थीं। इसलिए कंपनियों की भी जिम्मेदारी है कि वे स्थानीय लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।


