रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को असम विधानसभा चुनाव के लिए अपने चुनावी अभियान की शुरूआत की। कोकराझार जिले के गोसाईगांव में हेमंत सोरेन की सभा में भाग लेने के लिए भारी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे, खासतौर पर इस जनसभा में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। बारिश के बीच हेमंत सोरेन को सुनने के लिए छाता लगाकर लोग डटे रहे। इस रैली में हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा।
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रैली को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि ध्यान रखियेगा ये चुनाव बहुत ही विचित्र चुनाव है, एक तरह से एक ऐसा पूंजीपतियों का जमात खड़ा है, जहां ये नहीं चाहते कि इस देश का आदिवासी, गरीब, पिछड़ा, अल्पसंख्यक अपने पैरों पर खड़ा हो। वो इसलिए नहीं चाहता कि गुजरात में उसको घर बनाना है, सड़क बनाना है, नाली बनाना है तो मजदूर कहां से आएंगे। व्यापारी लोग कभी मजदूरी करता है, लेकिन दुर्भाग्य कि बात है कि इस राज्य को बनाने वाला, सवारंने वाला यहां के आदिवासियों की हालत बद से बदतर कर दिया इन लोगों ने। आज सिर्फ चुनाव के समय चुनावी रणनीति के तहत किसी के खाते में 500 डालो, किसी के खाते में 9000 डालों, किसी में 1000 डालों, फिर चुनाव के बाद ये सिरिंच लगाकर खून चूस लेंगे, ये लागे इतना खतरनाक लोग है बता दे रहें है। ये लोग देने वाला लोग नहीं है, ये लोग लेने वाला लोग है। जब तक इसका पेट नहीं भरेगा, इसका पेट नहीं भरेगा ये लोग देना नहीं।
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हेमंत सोरेन ने आगे कहा कि आज झारखंड में देखिये प्राइवेट स्कूल से निकाल निकालकर बच्चे को हमारे सरकारी स्कूल में दे रहा है। 9000 सीट के लिए 40 हजार बच्चा लोग आवेदन भर रहा है। ये लोग पैसा के दम पर संविधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर चुनाव के मैदान में आते है। मंच में इतना मीठा-मीठा बात करेगा, हम मीठा बात करने नहीं आये है। ये लोग इतना मीठा बोलेगा कि मधू भी फेल है। लेकिन हम लोग सच्चाई को दिखाते है। हमारा आने वाला पीढ़ी डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, पत्रकार , प्रोफेसर बने, आज देश में कितना हमारे देश में आदिवासी आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, पत्रकार है बताईये। गिना चुना लोग ही है। आज झारखंड में हमने कानून बनाया है कि हमारा आदिवासी डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर, पत्रकार बनेगा तो उसका पूरे पढ़ाई का खर्चा सरकार उठायेगा ये कानून हमने बनाया है। यहां भी बदलाव लाईये यहां भी ये कानून ला सकते है। हम लोग वीर की भूमि से आये है, झारखंड वीरों का भूमि है, ये आदिवासी समाज ऐसा समाज है जब देश ने आजादी का सपना भी नहीं देखा था तो उससे पहले से हमारा आदिवासी समाज लड़ाई लड़ रहा था। हम लोगों ने कभी किसी का गुलामी नहीं किया, मजूदरी किया लेकिन गुलामी नहीं खटा। लेकिन आज अपने ही देश के अंदर अपने ही लोगों के बीच हमें शर्मिंदा होना पड़ता है, उसके सामने झुकना पड़ता है, अब झुकने का जरूरत नहीं है। पहली बार हमारे मुख्यमंत्री बनने के बाद ये भारतीय जनता पार्टी के लोग भी अपने अपने राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने लगा। इन लोगों को दिखने लगा कि ये आदिवासी अपने पैरों पर खड़ा हो रहा है, कल को वोट मांगने आये तो चेहरा तो दिखाना है, इसलिए मुख्यमंत्री बनाने लगा। लेकिन वो ऐसा मुख्यमंत्री है जिसके सामने रबड़ स्टांप भी फेल है। आज इन लोगों को लगता है कि ये अश्वेघ का घोड़ा है जहां जाएगा वहीं विजय होगा। 2014 के बाद ये अश्मेघ घोड़ा चला था तो सबसे पहले इस अश्मेघ के घोड़ा को रोकने का काम यहीं हेमंत सोरेन और झारखंड के लोगों ने किया था। आज पहली बार हम असम आये है, हम सरकार और सत्ता के लिए नहीं आये है। यहां आपका अधिकार आपके घर में पहुंचे, आप का अधिकार जो सदियों से आपसे दूर रखा है उसको आपतक पहुंचाने के लिए हमलोग आये है। यहां बहुत सारा लोग आयेगा आपको गलत रास्ता दिखाएगा, लेकिन मंजिल नहीं मिलेगा। हम लोग आदरणीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के सिपाही है वो रास्ता भी दिखाते और मंजिल भी पहुंचाते है, हम लोग उसके सिपाही है। जो आदिवासी है वो मूलवासी है, सबसे पहले अधिकार आपका होना चाहिए लेकिन सबसे बाद में अधिकार आपको मिलता है। जब जब चुनाव आयेगा, जैसा शिकारी अपना जाल बिछाता है जानकर और चिड़ियां को पकड़ने के लिए, चुनाव का समय आया दाना फेंका और आप पकड़े गये, इसको ध्यान रखिये। चुनाव में बहुत हथकंडे अपनाये जाएंगे। सदियों से संघर्ष करने को मजबूर असम का शोषित और वंचित वर्ग अब संघर्ष नहीं करेगा। आपका मान-सम्मान तीर-धनुष आपके साथ है, मैं आपके साथ हूं।







