हेमंत सोरेन का हिमंता सरकार पर हमला, आदिवासियों को आदिवासियों से लड़ाया जा रहा है, कल्पना ने उठाया न्यूनतम मजदूरी का मामला

हेमंत सोरेन का हिमंता सरकार पर हमला, आदिवासियों को आदिवासियों से लड़ाया जा रहा है, कल्पना ने उठाया न्यूनतम मजदूरी का मामला

रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने शुक्रवार को असम विधानसभा चुनाव में जेएमएम प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार किया। हेमंत सोरेन ने असम के हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यहां की सरकार आदिवासियों का आदिवासियों से लड़ाने का काम कर रही है, हिंदू को मुसलमान से लड़ाने का काम कर रही है। वहीं कल्पना सोरेन ने असम के चाय बगानों में काम करने वाले मजदूरों को 250 रुपये न्यूनतम मजदूरी का मामला उठाया और कहा कि जेएमएम 350 रुपया न्यूनतम मजदूरी और महिलाओं को 2500 रुपया प्रतिमाह देने का काम सुनिश्चित करेगी।

एक करोड़ के इनामी माओवादी प्रशांत बोस का निधन,5 साल पहले पत्नी संग हुई थी गिरफ्तारी,200 से अधिक वारदातों का था मास्टरमाइंड
हेमंत सोरेन ने जेएमएम प्रत्याशी के समर्थन में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सम के चाय बागानों में अपने श्रम और संघर्ष से एक पूरी विरासत गढ़ने वाले आदिवासी और वंचित समाज ने देश-दुनिया को चाय से चलने वाली अर्थव्यवस्था दी।लेकिन बदले में उन्हें क्या मिला? सच्चाई यह है कि जिन हाथों ने इस पहचान को बनाया, वही आज भी हाशिए पर खड़े हैं।न सम्मानजनक मजदूरी, न ज़मीन पर अधिकार, न शिक्षा में समान अवसर, न समाज में सम्मानजनक स्थान।अपमानजनक शब्दों से बोला जाता है सो अलग। यह पूर्व की सरकारों की लंबे समय से चली आ रही उपेक्षा और भेदभाव की सोच को ही दर्शाता है।यह अन्याय अब और नहीं चलेगा।समय आ गया है कि इस व्यवस्था को बदला जाए।आप सभी से अपील है आगामी 9 अप्रैल के दिन तीर-धनुष निशान पर आशीर्वाद देकर आपके बेटे और भाई पबन सोतल को भारी वोटों से विजयी बनाएं और अपना हक़-अधिकार सुनिश्चित करें।


झारखंड के अंडर-19 क्रिकेट टीम में बंगाल के 26 वर्षीय खिलाड़ी, चयन प्रक्रिया और नियमों की पारदर्शिता पर उठे सवाल
वहीं कल्पना सोरेन ने कहा कि असम के हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों को हम आश्वस्त करना चाहते हैं कि जैसे ही असम में अधिकारों की सरकार बनती है, वर्षों से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे समाज को ST दर्जा दिलाया जाएगा।महिलाओं को ₹2500 प्रतिमाह सम्मान राशि, न्यूनतम ₹350 दैनिक मजदूरी सुनिश्चित करने सहित झामुमो द्वारा किए गए हर वादे को पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया जाएगा।अब समय है असम में अधिकार और सम्मान की सरकार का।पूर्व में हमारे पूर्वजों ने अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष किया था। आज असम का आदिवासी समाज भी यह ठान चुका है कि अब पूर्व की सरकारों द्वारा किए गए अन्याय को और नहीं सहेगा।अपने बच्चों और परिवार के बेहतर भविष्य पर हमारा अधिकार है, और हम इसे लेकर रहेंगे।इस अधिकार के लिए हमारी लड़ाई जारी है और जारी रहेगी।

 

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now