हजारीबाग के ओएसिस स्कूल पर लगे पेपर लीक के आरोप पर प्रिंसिपल ने वीडियो और पैकेट दिखाकर किया सनसनीखेज खुलासा

हजारीबाग के ओएसिस स्कूल पर लगे पेपर लीक के आरोप पर प्रिंसिपल ने वीडियो और पैकेट दिखाकर किया सनसनीखेज खुलासा

रांची: बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने हजारीबाग के ओएसिस स्कूल की भूमिका पेपर लीक मामले में सदिग्ध पाई थी। ईओयू के सूत्र के अनुसार, हजारीबाग के ओएसिस स्कूल से नीट-यूजी का पेपर बुकलेट नंबर 6136488 लीक हुआ था और ईओयू को बुकलेट बॉक्स से भी छेड़छाड़ के सबूत मिले थे।
स्कूल पर लगे आरोपों के बाद सोमवार को स्कूल के प्रिंसिपल एहसानुल हक मीडिया के सामने आये और उन्होने अपना पक्ष रखते हुए कई सनसनीखेज आरोप लगाये। उन्होने कहा कि स्कूल की पेपर लीक में कोई संलिप्तता नहीं है। स्कूल में प्रश्नपत्र 5 जून को परीक्षा से 15 मिनट पहले खुलता है, जबकि कहां ये जा रहा है कि पेपर 4 जून को ही लीक हो गया था। ईओयू और सीबीआई वहां जांच करें जहां पेपर 3 और 4 जून को आई थी, यहां तो पेपर 5 जून को आया है। उन्होने आगे कहा कि प्रश्नपत्र के साथ छेड़छाड़ की जो बात आ रही है वो गलत है क्योकि यहां पेपर ट्रंक में सात लेयर की सुरक्षा में आया था जिसकी जांच सीएस, ऑब्सर्वर, दो छात्र ने की थी। इसकी वीडियोग्राफी भी की गई है।

उन्होने आगे कहा कि पेपर लीक में बैंक और ट्रांसपोर्टेशन की लापरवाही सामने आई है जिसको नोटिस जारी किया गया है। बैंक में हम ईओयू के अधिकारियों के साथ गए थे, पहली बार हम गए थे तो उन्होने कहा कि यहां से पेपर नहीं गए है, जब हम तीसरी बार गए तो ईओयू ने डांटते हुए कहा कि पेपर तो यही से गए थे, फिर पेपर उनसे मांगा गया कि क्या क्या रिसिविंग है दिखाईये तो उन्होने से रिसिविंग में एक एनटीए का चालान था, उनको जब कहा गया कि कोरियर कंपनी से आपको जो मिला है उसका रिसिविंग दिखाईये तो उनके पास कोई रिसिविंग नहीं था, कोरियर कंपनी से कौन आया था बैंक मे पेपर जमा कराने वो नहीं बता पाए, किस गाड़ी से आये वो नहीं बता पाए, किसने रिसिविंग लिया नहीं बता पाए। उनसे ईआयू की टीम ने रिसिविंग मांगा लेकिन वो नहीं दे पाए।

जब हम कोरियर ऑफिर गए तो वहां इनक्वायरी हो रही थी, कि प्रश्न पत्र कैसे आया तो उन्होने बताया कि एक नेटवर्क की गाड़ी से आया। नेटवर्क की गाड़ी वो गाड़ी होती है जो कई जगह सामान भेजती है, जहां जरूरत हो वहां। कोरियर की कंपनी की गाड़ी में सिर्फ एक ड्राइवर था जो प्रश्नपत्र लेकर आया था। वो प्रश्नपत्र को ऐसे ही गिराकर चला गया जबकि एक दो किलोमीटर पर ही बैंक था। जब उनसे पूछा गया कि बैंक तक गाड़ी क्यों नहीं गई तो बताया, ड्राइवर नहीं माना। उनसे पूछा गया कि यहां से बैंक प्रश्नपत्र कैसे पहुंचाया तो बताया ई रिक्सा से पहुंचाया। इस बात पर ईआयू के अधिकारियों ने कहा कि ये बहुत ही गैरजिम्मेदाराना काम है, ये बहुत ही सेंसेटिव पेपर थे। इस परीक्षा में सरकार का एसओपी पूरा नहीं किया गया, जबकि स्कूलों में सरकार की एसओपी पूरी की गई लेकिन कोरियर कंपनी और ट्रांसपोटेंशन में ऐसा नहीं हुआ।

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