हजारीबाग वन भूमि घोटाला: एसीबी ने नेक्सजेन कंपनी के संचालक विनय सिंह को रांची से किया गिरफ्तार

हजारीबाग वन भूमि घोटाला, ACB ने 13 सरकारी गवाह बनाए, कहा- विनय चौबे ने विनय सिंह की पत्नी के नाम जमाबंदी के लिए दवाब बनाया

रांची : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी)की टीम ने गुरुवार को  वन भूमि घोटाला केस में बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑटोमोबाइल कंपनी  नेक्सजेन के संचालक  विनय सिंह  को रांची से गिरफ्तार कर लिया। एसीबी ने 25 सितंबर को कांड संख्या 11/2025 दर्ज करते हुए विनय सिंह को नामजद आरोपित बनाया और उसी दिन गिरफ्तारी भी कर ली। बताया जा रहा है कि वे रांची के आनंदपुर, स्ट्रीट नंबर-3 में रहते हैं और निलंबित आईएएस अधिकारी  विनय कुमार चौबे के करीबी हैं।

आरोप: वन भूमि की अवैध जमाबंदी

कारोबारी विनय सिंह पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर **गैर मजरूआ खास और जंगल-झाड़ी श्रेणी की भूमि** की अवैध जमाबंदी कराई। एसीबी की जांच में सामने आया है कि यह काम आपराधिक साजिश के तहत किया गया। एसीबी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2013 में हजारीबाग उपायुक्त कार्यालय ने पांच प्लॉट की अवैध जमाबंदी को रद्द कर दिया था। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भी इस रद्दीकरण को सही ठहराया था।

इस तरह हुआ घोटाला

5 दिसंबर 2012 हजारीबाग वन प्रमंडल पदाधिकारी ने पत्र जारी कर कहा था कि अधिसूचित वन भूमि पर गैर-वानिकी कार्य और अतिक्रमण  भारतीय वन अधिनियम व वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन है।
12 दिसंबर 1996 को  सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि *जंगल-झाड़ी दर्ज भूमि* का उपयोग भारत सरकार की अनुमति के बिना गैर-वानिकी कार्यों में नहीं किया जा सकता।

एसीबी की कार्रवाई

एसीबी का कहना है कि अवैध जमाबंदी को लेकर हजारीबाग अंचल अधिकारी सदर  ने भी इसे गलत ठहराया था। इसके बावजूद, अधिकारियों के साथ मिलकर विनय सिंह ने जमीन की जमाबंदी कराई। विनय सिंह उस जमीन के क्रेता (खरीददार) बताए जाते हैं। इसी आपराधिक साजिश और घोटाले में संलिप्तता के चलते एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया है।

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