झारखंड में शिक्षा बना ‘धंधा’? री-एडमिशन फीस वसूली पर बाबूलाल मरांडी का हमला

babulal marandi on crime

रांची: झारखंड में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन प्रदेश के अभिभावकों के लिए ये शुरुआत आर्थिक बोझ लेकर आई है। निजी स्कूलों द्वारा री-एडमिशन फीस के नाम पर की जा रही अवैध वसूली ने राज्यभर में चिंता की लहर पैदा कर दी है।

इसी मुद्दे पर अब विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से उन्होंने शिक्षा के नाम पर चल रहे इस कथित ‘व्यापार’ की कड़ी आलोचना की है।

मरांडी ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि “जब सरकार खुद कह चुकी है कि री-एडमिशन फीस नहीं ली जानी चाहिए, तो फिर निजी स्कूलों की ये मनमानी कब तक चलेगी? क्या सरकार की बातों का अब स्कूलों पर कोई असर नहीं रहा?”

झारखंड में री एडमिशन फीस के नाम पर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर दोहरी मार पड़ रही है — एक तरफ महंगाई, दूसरी तरफ बच्चों की पढ़ाई के नाम पर अनाप-शनाप फीस। कई स्कूलों में तो यह फीस ₹5,000 से लेकर ₹25,000 तक वसूली जा रही है, वो भी हर साल।

सरकारी निर्देश बनाम ज़मीनी हकीकत 


गौरतलब है कि कुछ समय पहले शिक्षा मंत्री ने भी स्पष्ट निर्देश दिया था कि किसी भी निजी विद्यालय को री एडमिशन फीस लेने का अधिकार नहीं है। लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश स्कूल इस आदेश को नजरअंदाज कर खुलेआम वसूली कर रहे हैं।

मजबूरी में चुप हैं अभिभावक


कई अभिभावकों का कहना है कि वे स्कूलों के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं, क्योंकि इससे उनके बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है।
“स्कूल वाले सीधा बोल देते हैं — फीस दो वरना नाम काट देंगे,” एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

मरांडी ने की कार्रवाई की मांग:
बाबूलाल मरांडी ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है । गौरतबल है कि शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के सख्त निर्देश दिए थे लेकिन इसका असर होता नहीं दिख रहा है ।

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