Gopal Khemka Murder Case: गोपाल खेमका की हत्या करने से पहले शूटर उमेश यादव ने गोली चलाने की ट्रेनिंग ली थी। उसने मालसलामी (गंगा घाट की तरफ) में ही पिस्टल में गोली लोड करना सीखा। इसके बाद वहीं फायरिंग भी की। दो से तीन बार में वह पिस्टल चलाना सीख गया। हथियार को आरोपित अपने घर में ही रखता था। जब भी वह गोली चलाता, अशोक साव उसी जगह मौजूद रहता था।
हत्या करने के बाद जब बाकी के साढ़े तीन लाख रुपये अशोक ने शूटर को दिये तो वह अपनी बेटी के स्कूल चला गया। वहां 45 हजार रुपये उसने बकाया स्कूल फीस जमा की। बाकी के रुपये पुलिस ने उसके पास से बरामद किए हैं। पूर्व में उमेश जेनरेटर चलाने का काम करता था। इसके बाद वह बेरोजगार हो गया था। नालंदा स्थित एक शादी समारोह में जब उमेश और अशोक की मुलाकात हुई तो उसने उसे काम दिलाने का वादा किया। इसके बाद रोज दोनों में बात होती थी।
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पुलिस ने यह भी जानकारी दी है कि कारोबारी गोपाल खेमका की हत्या करने से पहले शूटर उमेश यादव ने ही उनकी रेकी की थी। उसने किसी भी लाइनर की मदद नहीं ली। वारदात के दिन गोपाल खेमका का पीछा बांकीपुर क्लब से उमेश ने किया था। पुलिस ने यह खुलासा करते हुए बताया कि व्यवसायी गोपाल खेमका ने बाकरगंज के पास अपने एक साथी को छोड़ने के लिए गाड़ी रोकी थी। इसके बाद उनके साथी चले गए।
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