रांचीः झारखंड में एसपी रैंक के 6 अधिकारियों को शो-कॉज जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि बिना आदेश के मुख्यालय छोड़ने को लेकर इनसे जवाब मांगा गया है। मिली जानकारी के अनुसार, 26 अप्रैल 2026 की रात झारखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा अलग-अलग जिले और समादेष्टा में तैनात एसपी रैंक के अधिकारियों से लाइव लोकेशन मांगा गया था। इस दौरान खबर है कि कई अधिकारी का लोकेशन अपने मुख्यालय से बाहर पाया गया। इसके बाद पुलिस मुख्यालय द्वारा इन अधिकारियों को शो काॅज जारी कर जवाब मांगा गया है।डीजीपी तदाशा मिश्रा ने झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप) और एसआइआरबी के पांच कमांडेंट से बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर स्पष्टीकरण मांगा है। डीआइजी जैप के औचक निरीक्षण में इन अधिकारियों को मुख्यालय से बाहर पाया गया था, जिसके बाद डीजीपी ने कार्रवाई की।
इन अधिकारियों में जैप-8 पलामू की कमांडेंट कुसुम पुनिया, एसआइआरबी-2 खूंटी की कमांडेंट एमेल्डा एक्का, जैप-9 साहिबगंज की कमांडेंट रिष्मा रमेशन, जैप-5 देवघर के कमांडेंट अंजनी अंजन व जैप-4 बोकारो के कमांडेंट ऋषभ कुमार झा शामिल हैं।डीजीपी ने यह स्पष्टीकरण डीआइजी जैप के पत्र के आलोक में किया है। डीआइजी जैप कार्तिक एस. ने एक दिन पहले औचक निरीक्षण के क्रम में सभी कमांडेंट से उनका लोकेशन शेयर करने को कहा।सबने अपना-अपना लोकेशन शेयर किया तो इन पांच कमांडेंट का लोकेशन उनके मुख्यालय से बाहर मिला। कोई रांची में था तो कोई कहीं और किसी काम पर। इसके बाद डीआइजी ने इसकी शिकायत DGP तदाशा मिश्रा से की।
बिना अनुमति मुख्यालय छोड़कर घूमते है अधिकारी
आपको बता दें कि पिछले 17 अप्रैल को झारखंड पुलिस मुख्यालय के द्वारा एक आदेश जारी किया गया था। जिसमें कहा गया था प्रायः ऐसा देखा जा रहा है कि विभिन्न जिला और वाहिनी के पुलिस अधीक्षक और समादेष्टा बिना सक्षम प्राधिकार के अनुमति के अपना मुख्यालय छोड़कर रांची या अन्य भ्रमण करते है। किसी घटना अथवा विधि व्यवस्था के संदर्भ में आवश्यक विमर्श के लिए पुलिस मुख्यालय द्वारा सम्पर्क करने पर अनुपस्थित पाये जाते है। यह स्थिति अत्यन्त ही खेदजनक है। अतः निदेशित किया जाता है कि एडीजी, आईजी, डीआईजी, एसपी और कमांडेंट अपने अधोहस्ताक्षरी को पूर्व सूचना दिये बगैर अपना मुख्यालय छोड़कर रांची अथवा जिला से बाहर भ्रमण के लिए नहीं जायेंगें।कृपया इसका अनुपालन दृढ़ता से सुनिश्चित किया जाय।इससे विधि व्यवस्था बनाए रखने में दिक्कत होती है। इन्हीं सभी समस्याओं को देखते हुए डीजीपी ने अधिकारियों से कहा था कि वे जब भी मुख्यालय छोड़ेंगे तो इसकी अनुमति अपने वरीय पदाधिकारियों से लेंगे। वरीय पदाधिकारियों के लोकेशन की निगरानी भी होती रहेगी।


