जमशेदपुर: भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) झारखंड की ओर से सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को जमशेदपुर में सातवें CII झारखंड सेफ्टी टॉक का शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन और प्रदर्शनी के पहले दिन उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, सुरक्षा विशेषज्ञों और तकनीकी विशेषज्ञों ने औद्योगिक सुरक्षा को लेकर अपने विचार साझा किए। सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि औद्योगिक सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकने और कर्मचारियों की जान बचाने के लिए इसे उद्योगों की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाना होगा।
- सुरक्षा के लिए चेकलिस्ट से आगे बढ़ने की जरूरत: राजीव मंगल
- मानव जीवन से बढ़कर कोई उत्पादन लक्ष्य नहीं: दिलू पारिख
- झारखंड में औद्योगिक सुरक्षा के साथ सड़क सुरक्षा भी जरूरी
- AI और डिजिटल तकनीक से दुर्घटनाओं की रोकथाम पर जोर
- सुरक्षा नियमों का पालन ही नहीं, जोखिमों पर नियंत्रण भी जरूरी
- 250 से अधिक प्रतिनिधि और 50 से ज्यादा प्रदर्शक शामिल
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए गंभीर जोखिमों की पहचान, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, प्रबंधन की जवाबदेही और कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है।


सुरक्षा के लिए चेकलिस्ट से आगे बढ़ने की जरूरत: राजीव मंगल
टाटा स्टील लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) और CII ईस्टर्न रीजन सेफ्टी सब-कमेटी के चेयरमैन राजीव मंगल ने उद्योगों से केवल औपचारिक नियमों के पालन तक सीमित नहीं रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक आधारित और जोखिमों की समय रहते पहचान करने वाली प्रणाली में बदलना होगा।
उन्होंने चिंता जताई कि व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों (PPE) और पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों से छोटी दुर्घटनाओं में कमी आई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मौतों की संख्या में अपेक्षित गिरावट नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक दुर्घटना नहीं होने के रिकॉर्ड से प्रबंधन में लापरवाही या दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग में कमी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
राजीव मंगल ने भारी वाहनों में प्रॉक्सिमिटी सेंसर, चलती मशीनों के लिए आइसोलेशन सेंसर और डिजिटल तकनीक से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने बड़ी कंपनियों से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने में सहयोग करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार धनबाद, बोकारो और रांची जैसे क्षेत्रों में करने की आवश्यकता बताई।

मानव जीवन से बढ़कर कोई उत्पादन लक्ष्य नहीं: दिलू पारिख
CII झारखंड स्टेट काउंसिल के चेयरमैन और वैदेही मोटर्स के निदेशक दिलू पारिख ने कहा कि औद्योगिक विकास और मानव सुरक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं। किसी भी उत्पादन लक्ष्य या व्यावसायिक समयसीमा से अधिक महत्वपूर्ण कर्मचारियों का जीवन है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर में हर साल कार्यस्थल से संबंधित दुर्घटनाओं और बीमारियों के कारण करीब 30 लाख लोगों की मौत होती है। खराब सुरक्षा व्यवस्था के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
दिलू पारिख ने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में 50 से अधिक विशेषज्ञ वक्ता शामिल हो रहे हैं, जबकि प्रदर्शनी में 50 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें सीमित स्थानों में काम करने, ऊंचाई पर कार्य करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सड़क सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं से संबंधित तकनीकों को प्रदर्शित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा में निवेश को खर्च नहीं, बल्कि उद्योगों की दीर्घकालिक मजबूती और बेहतर उत्पादकता के लिए जरूरी कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।

झारखंड में औद्योगिक सुरक्षा के साथ सड़क सुरक्षा भी जरूरी
CII झारखंड स्टेट काउंसिल के वाइस चेयरमैन और टाटा स्टील लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदर रामम ने कहा कि सुरक्षा को केवल फैक्ट्री या खदान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। कर्मचारियों की यात्रा और उनके दैनिक जीवन में भी सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
उन्होंने झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में लगभग 3,800 सक्रिय औद्योगिक प्रतिष्ठान और 10 लाख MSME होने की बात कही गई है, जिनमें करीब 37 लाख लोग कार्यरत हैं। उन्होंने राज्य में हर साल औसतन 4,200 सड़क दुर्घटना मौतों का आंकड़ा भी सामने रखा और सड़क सुरक्षा को गंभीरता से लेने की आवश्यकता बताई।
डीबी सुंदर रामम ने कहा कि खदानों में दुर्घटनाएं, ऊंचाई से गिरने और औद्योगिक प्रक्रियाओं में सुरक्षा संबंधी चूक को रोकने के लिए जोखिमों की पहचान पहले ही करनी होगी। दुर्घटना होने के बाद कारणों का विश्लेषण करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।
उन्होंने सुरक्षा को आदत और कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। साथ ही, सम्मेलन को भविष्य में रांची तक विस्तारित करने और व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े नए कानूनों के क्रियान्वयन के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया।

AI और डिजिटल तकनीक से दुर्घटनाओं की रोकथाम पर जोर
CII झारखंड सेफ्टी पैनल के संयोजक और टाटा स्टील लिमिटेड के चीफ सेफ्टी नीरज कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत के तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्र के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कई बार सुरक्षा प्रक्रियाएं मौजूद होने के बावजूद कार्यस्थल पर उनका सही तरीके से पालन नहीं हो पाता। गंभीर जोखिमों से जुड़े सुरक्षा उपायों में एक छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
नीरज कुमार सिन्हा ने लॉकआउट-टैगआउट (LOTO), इंजीनियरिंग आधारित सुरक्षा उपायों, AI और डिजिटल ट्विन जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की थकान, गर्मी के दबाव और मानसिक स्थिति जैसे मानवीय पहलुओं को भी सुरक्षा योजना में शामिल करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सुरक्षा ऑडिट के लिए आगे आने वाले 10 MSME को सुरक्षा सुधार के क्षेत्र में बदलाव लाने वाले उद्यमों के रूप में सम्मानित किया जा रहा है। उनके अनुसार, किसी सुरक्षा प्रणाली की असली सफलता ऑडिट में मिले अंकों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि वह मुश्किल परिस्थितियों में कर्मचारियों की जान कितनी प्रभावी ढंग से बचा पाती है।
सुरक्षा नियमों का पालन ही नहीं, जोखिमों पर नियंत्रण भी जरूरी
CII जमशेदपुर जोनल काउंसिल के वाइस चेयरमैन और टाटा स्टील UISL के प्रबंध निदेशक अतुल भटनागर ने कहा कि औद्योगिक सुरक्षा के लिए केवल पुराने रिकॉर्ड और ऑडिट चेकलिस्ट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने जमशेदपुर के भारी उद्योगों, परिवहन नेटवर्क और विनिर्माण इकाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक प्रगति तभी टिकाऊ हो सकती है, जब उत्पादन प्रक्रिया में लगे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में प्रोसेस सेफ्टी, गंभीर दुर्घटनाओं को रोकने वाले सुरक्षा उपायों, ऊंचाई पर सुरक्षित कार्य और आधुनिक उपकरणों के निरीक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है।
अतुल भटनागर ने कहा कि नियमों का पालन कंपनी को जवाबदेही से बचाने में मदद कर सकता है, लेकिन गंभीर जोखिमों पर प्रभावी नियंत्रण ही लोगों की जान बचाता है।
250 से अधिक प्रतिनिधि और 50 से ज्यादा प्रदर्शक शामिल
CII झारखंड सेफ्टी टॉक 2026 के पहले दिन 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जबकि प्रदर्शनी में 50 से अधिक प्रदर्शक शामिल हुए। कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों के साथ उद्योगों के शीर्ष अधिकारियों के बीच सुरक्षा को लेकर चर्चा भी हुई।
CEO लीडरशिप सत्र में सुरक्षा को बोर्डरूम स्तर पर प्राथमिकता देने, ठेकेदारों की सुरक्षा, कर्मचारियों की भागीदारी और जोखिमों की समय रहते पहचान जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इस सत्र में JCAPCPL के प्रबंध निदेशक कपिल मोदी, TRF लिमिटेड के प्रबंध निदेशक यूके सिंह, जैमिपोल लिमिटेड की प्रबंध निदेशक स्वस्तिका बसु सहित विभिन्न औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में ऊंचाई पर काम करने के लिए सुरक्षित उपकरणों, प्रोसेस सेफ्टी, तकनीक आधारित निगरानी, AI और रियल टाइम अलर्ट जैसी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। प्रदर्शनी में सुरक्षा तकनीकों और उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।
सम्मेलन के पहले दिन विशेषज्ञों ने एकमत होकर कहा कि औद्योगिक सुरक्षा को केवल कागजी नियमों और औपचारिक प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए प्रबंधन की जवाबदेही, कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी, आधुनिक तकनीक और जोखिमों को पहले ही नियंत्रित करने की व्यवस्था जरूरी है। सम्मेलन का मुख्य संदेश रहा कि औद्योगिक प्रगति तभी सार्थक है, जब काम करने वाला हर व्यक्ति सुरक्षित अपने घर लौट सके।







