रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर आंदोलन कर रहे युवाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय दिलाने का भरोसा जताया।उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी समस्या का समाधान लाठी-डंडों से नहीं, बल्कि बातचीत और संवाद के माध्यम से ही निकाला जा सकता है।राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिशों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ स्वार्थी तत्व माहौल बिगाड़ने में जुटे हैं।
उन्होंने चेताया कि छात्रों के इस आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए युवाओं को गुमराह करने वालों से बचने की जरूरत है।हेमंत सोरेन ने जोर देकर कहा कि युवाओं की चिंता उनकी अपनी प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छात्र आंदोलन का 16वां दिन
वहीं, रांची में छात्रों के आंदोलन का आज 16वां दिन है। कई छात्र भूख हड़ताल पर हैं। उनकी मांग है कि JPSC-JSSC की परीक्षा रद की जाए और जिन भी परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है, उनकी CBI जांच कराई जाए।इसको लेकर सरकार की छात्रों के साथ बातचीत का दौर चल रहा है। इसके अलावा अलग-अलग छात्र संगठनों ने भी सरकार को अपनी मांगें सौंपी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार छात्रों की बात मान लेगी।वहीं, छात्रों ने साफ तौर पर कहा है कि अगर आज उनकी बात नहीं मानी जाती है, तो वह 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव करेंगे। उनके इस प्रदर्शन का तमाम छात्रों का समर्थन मांगा है।
मुख्यमंत्री ने आदिवासी महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि हर समस्या का समाधान संवाद और संवैधानिक तरीके से होता है। अपने ही घर के लोगों के साथ लाठी-डंडे से किसी समस्या का समाधान नहीं होता, नुकसान जरूर होता है।इसलिए आज इस मंच से विशेषकर अपने नौजवान साथियों से कहना चाहता हूं कि मैं भी कोई बूढ़ा नहीं हूं साथियों, मैं भी आप ही लोगों के लगभग का हूं। आपकी भावनाएं और आपकी चिंताएं, मेरी चिंताएं हैं।
आज संवैधानिक पद पर बैठते हुए मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि आपके साथ पारदर्शिता के साथ न्याय होगा और न्याय होते हुए दिखाई भी देगा।आज का यह महोत्सव यादगार बने, प्रेरणादायक बने और हम इस गर्व के साथ आगे बढ़ें कि हम ऐसे वीर सपूतों के वंशज हैं, जिन्होंने अपने हक-अधिकार और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया।







