डेस्कः गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम देवघर जमीन खरीद से जुड़े एक और मामले में फंस गई है। अनामिका गौतम समेत चार लोगों पर फर्जी कागजात के जरिये मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी का मामला सामने आया है। जसीडीह थाने में शिवदत्त शर्मा में इसको लेकर मामला दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी देवता पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।इस पूरे मामले में नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी निशिकांत दुबे के परिवार के बचाव में उतर आए है।
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परित्रान मेडिकल ट्रस्ट, देवघर के सेकेट्री शिवदत्त शर्मा द्वारा दर्ज कराये गए एफआईआर के बाद गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी अनामिका गौतम, विमल कुमार अग्रवाल, देवता कुमार पांडेय और पुनीत कुमार अग्रवाल की मुश्किलें और बढ़ गई है। 14 जुलाई को सीआईडी ने बोकारो में वन भूमि की फर्जी तरीके से खरीद-बिक्री मामले में राजबीर कंस्ट्रक्शन के पुनीत अग्रवाल को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। देवता पांडेय को बुधवार को गिरफ्तार किया जा चुका है, अब अनामिका गौतम और विमल कुमार अग्रवाल पर खतरा मंडरा रहा है।
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शिवदत्त शर्मा ने जसीडीह थाने में जो मामला दर्ज कराया है उसके अनुसार, अनामिका गौतम की अध्यक्षता वाले बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट ने जानबूझकर परित्राण मेडिकल कॉलेज ट्रस्ट के नाम से जारी सर्टिफिकेट का दुरूपयोग कर 150 एमबीबीएस की सीटों वाले मेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति प्राप्त करने का प्रयास किया गया। उन्होने थाने में जो शिकायत दर्ज कराई है उसके अनुसार, ये सर्टिफिकेट नीलाम की गई संपत्ति का हिस्सा हिस्सा नहीं था और न ही परित्राण मेडिकल ट्रस्ट से इसको लेकर कोई वैद्यानिक अनुमति ली गई। धोखाधड़ी के आधार पर नेशनल मेडिकल काउंसिल एक्ट-2019 के प्रावधानों का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रयास किया गया।
चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420, 467, 468, 471, 474 सहपठित धारा 120बी और 34 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 316, 318, 338, 340, 3339 सहपठित धारा 61 एक और 4 पांच के अंतर्गत केस दर्ज कराया गया है।
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देवघर जिले के अंतर्गत आने वाले 26.5 एकड़ जमीन जो परित्राण ट्रस्ट से नीलामी की जरिये बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की पत्नी की अध्यक्षता वाले बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट से 2023 में ले ली गई थीं। 60.10 करोड़ में नीलामी के जरिये जीते गए इस जमीन को लेकर पर पहले से विवाद चला आ रहा था। इस जमीन को धोखाधड़ी से लिये जाने को लेकर भी 28 मार्च 2024 को जसीडीह थाने में मामला दर्ज कराया जा चुका है। जिसमें निशिकांत दुबे उनकी पत्नी अनामिका गौतम सहित अन्य पर 150 करोड़ से ज्यादा कीमत वाली जमीन को 60 करोड़ में फर्जी तरीके से हड़पने का आरोप लगाया गया था।
शिवदत्त शर्मा ने बताया था कि 2009 में उन्होने परित्रान ट्रस्ट की जमीन पर मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 93 करोड़ का कर्जा लिया था। उन्होने बताया कि जैसे ही उन्होने कर्जा लिया वैसा ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने नीतियों में बदलाव कर दिया, इसकी वजह से कॉलेज को एमसीआई से मान्यता नहीं मिली। जब मान्यता नहीं मिली तो छात्रों ने दाखिला नहीं लिया और जब दाखिला नहीं हो सकता तो कर्जा चुकाने के लिए ट्रस्ट के पास पैसे नहीं आये, पैसे नहीं आने की वजह से कॉलेज शुरू नहीं हो सका। मेडिकल की पढ़ाई शुरू नहीं होने की वजह से ट्रस्ट कर्जा नहीं चुका पाया इसके बाद बैंक ने ट्रस्ट को डिफाल्टर घोषित कर दिया। इसके बाद लोन अकाउंट को एनपीए कर दिया गया। इसके बाद धोखे से निशिकांत दुबे की पत्नी की अध्यक्षता वाले बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज ट्रस्ट से जमीन बैंकों पर दवाब बनाकर नीलामी के जरिये गलत तरीके से हड़पने का काम किया। शिवदत्त शर्मा ने आरोप लगाया है कि जमीन लेने के बाद अब फर्जी तरीके से उस जमीन पर मेडिकल कॉलेज खोलने की कोशिश हो रही है जिसको लेकर उन्होने 22 जुलाई को पत्र भी लिखा है।
निशिकांत दुबे की पत्नी पर हुए एफआईआर पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी,राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी अपनी जगह है, लेकिन इस प्रतिस्पर्धा में नेताओं के समर्थकों या विशेषकर महिलाओं और परिवार को घसीटना राजनीतिक शुचिता के खिलाफ है।
सुनने में आया है कि सांसद श्री @nishikant_dubey जी की धर्मपत्नी पर 47वां मुकदमा दर्ज किया गया है। और निशिकांत जी के समर्थक देवता पांडेय को गिरफ़्तार भी किया गया है । संभव है कि यह सब आपकी जानकारी के बिना हुआ हो और आपके कुछ महत्वाकांक्षी अधिकारियों का कारनामा हो। ऐसे अफ़सर वही लोग हैं जिन्होंने अतीत में अपने निजी स्वार्थ के लिये आपको इस्तेमाल किया और मुसीबत में डाला।
मेरा आपसे आग्रह है कि ऐसे अफसरों से बचिए। ये अधिकारी आपको अनावश्यक विवादों में घसीट कर आपकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। राजनीतिक लड़ाई सीधे होनी चाहिए, परिवारों और सहयोगी/समर्थकों को निशाना बनाना एक स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी नहीं है।आशा है आप इस मामले का संज्ञान लेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि सत्ता का दुरुपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए न हो।














