पटना: विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव और एक सीट पर उप चुनाव को लेकर एनडीए के घटक दलों के बीच सीटों का बंटवारा लगभग तय हो गया है।भाजपा और जदयू के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बनने के बाद सीटों के वितरण की तस्वीर साफ हो गई है।गठबंधन की ओर से नौ में आठ सीटों के अलावा एक उप चुनाव वाली सीट पर भी उम्मीदवार उतारे जाएंगे।
जदयू को मिली नीतीश वाली सीट
पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से रिक्त हुई विधान परिषद सीट जदयू के खाते में जाएगी।नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी। इस सीट का कार्यकाल वर्ष 2030 तक है।ऐसे में जदयू को चुनावी हिस्सेदारी के अलावा एक अतिरिक्त राजनीतिक लाभ भी मिल गया है। इसके बाद जनता दल यूनाइटेड ने बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस संबंध में पत्र जारी किया है।पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे व सूबे के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार द्विवार्षिक चुनाव के उम्मीदवार होंगे।इसके अलावा भारती मेहता को भी कैंडिडेट बनाया गया है।पश्चिम चंपारण की रहने वाली शिवरानी देवी प्रजापति भी कैंडिडेट बनी है।वहीं एक सीट पर हो रहे उपचुनाव जो नीतीश कुमार के इस्तीफा से खाली हुई है, उस पर शेखपुरा के ललन प्रसाद उम्मीदवार होंगे।
जनता दल (यूनाइटेड) ने 2026 के बिहार विधान परिषद चुनाव और उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी की है।
द्विवार्षिक चुनावों के लिए निशांत (पटना), भारती मेहता (मधुबनी) और शिवरानी देवी प्रजापति (पश्चिमी चंपारण) को मैदान में उतारा गया है, जबकि उपचुनाव वाली सीट के लिए ललन प्रसाद… pic.twitter.com/yXph9Riscj
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 5, 2026
8 सीटों का फार्मूला तय
चुनाव वाली आठ सीटों में से पांच सीटें भाजपा और तीन सीटें जदयू को मिलेंगी।शुरुआती दौर में जदयू चार सीटों की मांग कर रहा था, लेकिन बाद में वह तीन सीटों पर सहमत हो गया।इसके बावजूद उप चुनाव वाली सीट मिलने से जदयू की कुल हिस्सेदारी मजबूत बनी हुई है।
सहयोगी दलों को भाजपा देगी हिस्सा
एनडीए के भीतर पहले से यह समझ बनी हुई थी कि छोटे सहयोगी दलों को सीटें भाजपा अपने हिस्से से देगी।इसी फार्मूले के तहत भाजपा अपनी पांच सीटों में से एक-एक सीट लोजपा (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को देने पर विचार कर रही है। इससे सहयोगी दलों की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।
लोजपा (रा) के दावे को मिली बढ़त
लोजपा (रामविलास) ने परिषद की एक सीट पर मजबूत दावा पेश किया है।पार्टी के पास 19 विधायक हैं, जिसके कारण उसके दावे को प्राथमिकता दी जा रही है।एनडीए नेतृत्व भी मानता है कि विधानसभा में संख्या बल के आधार पर लोजपा (रा) की दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
रालोमो से पुराना वादा निभाने की तैयारी
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के लिए भी भाजपा सकारात्मक रुख अपनाए हुए है।भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने विधानसभा चुनाव के दौरान लिखित रूप से रालोमो को एक सीट देने का आश्वासन दिया था।पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश राज्य सरकार में मंत्री हैं, जिससे रालोमो की दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।
हम को अगले साल का इंतजार
हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा भी परिषद की एक सीट की मांग कर रही है, लेकिन मौजूदा समीकरणों में उसके लिए जगह बनती नहीं दिख रही है।भाजपा अपनी सीटों की संख्या तीन से कम नहीं करना चाहती। ऐसे में हम को अगले वर्ष होने वाले अवसरों तक इंतजार करने की सलाह दी जा सकती है।
गठबंधन संतुलन साधने की चुनौती
विधान परिषद चुनाव के बहाने एनडीए नेतृत्व ने सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।भाजपा और जदयू ने अपने-अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए छोटे दलों को भी प्रतिनिधित्व देने का रास्ता निकाला है।अब नजर इस बात पर रहेगी कि घोषित फार्मूले के तहत किन नेताओं को उम्मीदवार बनाया जाता है।


