जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, 15 सीटें नहीं मिली तो चुनाव में 100 सीटों पर लड़ेंगे, हम को मान्यता मिले ये मुख्य उद्देश्य

जीतन राम मांझी का बड़ा बयान, 15 सीटें नहीं मिली तो चुनाव में 100 सीटों पर लड़ेंगे, हम को मान्यता मिले ये मुख्य उद्देश्य

डेस्कः केंद्रीय मंत्री और हम पार्टी के संरक्षक-संस्थापक जीतन राम मांझी ने विधानसभा चुनाव से पहले सीट बंटवारे को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होने बोधगया में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य है कि किसी भी हाल में अपनी पार्टी को हम को मान्यता दिलाना। इसके लिए पार्टी को कम से कम आठ सीटों पर जीत हासिल हो और कुल मतों का छह प्रतिशत वोट प्राप्त हो। उन्होने कहा कि ये व्यवहारिक तौर पर तभी संभव हो सकता है कि जब पार्टी को एनडीए गठबंधन की ओर से 15 सीटें दी जाए, क्योकिं सभी सीटों पर जीत संभव नहीं होता है।

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मांझी ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हम पार्टी को संतोषजनक सीटें नहीं दी गई तो हम अकेले ही मैदान में उतरेगी और कम से कम 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने दावा किया कि हर विधानसभा क्षेत्र में उनके 10–15 हजार वोटर मौजूद हैं और इस आधार पर वे चुनाव में अकेले भी 6% वोट हासिल कर सकते हैं। उन्होंने उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को बने दस साल हो चुके हैं और अब तक निबंधित (Unrecognized) पार्टी बने रहना उनके लिए अपमानजनक है। इसलिए इस बार का चुनाव उनके लिए “करो या मरो” की स्थिति है।

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एनडीए में अपनी ताकत का दावा करते हुए मांझी ने कहा कि उनकी पार्टी बिना पैसा खर्च किए भीड़ जुटा लेती है, जबकि दूसरी पार्टियां पैसे के दम पर भीड़ बुलाती हैं। उन्होंने कहा कि यह बात एनडीए के नेता भी जानते हैं और सीट बंटवारे में यह देखा जाएगा कि कौन सी पार्टी वास्तव में जिताऊ है। मांझी ने विश्वास जताया कि उन्हें पर्याप्त सीटें मिलेंगी और 2025 में उनकी पार्टी मान्यता प्राप्त हो जाएगी।

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मान्यता हासिल करने के लिए क्या जरूरी?
एक पॉलिटिकल पार्टी को राज्य में मान्यता हासिल करने के लिए लगातार 5 साल की अवधि में राजनीतिक कामों लगा रहना चाहिए। इसके अलावा राज्य के विधानसभा चुनाव में डाले गए कुल वैध मतों के कम से कम 6 फीसदी वोट मिलने चाहिए। साथ ही राज्य विधानसभा की कुल सीटों में से कम से कम 3 सीटें जीतनी चाहिए। वहीं, लोकसभा चुनाव में 1 सीट जीतनी चाहिए। जब एक बार पार्टी को मान्यता मिल जाती है तो उस दल को चुनाव चिन्ह स्थायी रूप से मिल जाता है और चुनाव प्रचार-प्रसार में निर्वाचन आयोग की ओर से कुछ सुविधाएं दी जाती हैं।

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