रांचीः झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर वोटिंग शुरु हो गई है। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग मतदान का समय है । बीजेपी विधायक रांची के रेडिशन ब्लू होटल से बस में रवाना हुए हैं। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री भी झारखंड में मौजूद हैं और बीजेपी के विधायकों को एकजुट रखते हुए नजर आ रहे हैं ।
राज्यसभा चुनाव के लिए 81 विधायक अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनावी आंकड़ों के अनुसार जेएमएम के वोट से बैद्यनाथ राम की जीत तय है। दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के प्रणव झा और एनडीए समर्थक परिमल नाथवानी में मुकाबला है। विधानसभा के कमरा नंबर 042 में विधायक वोट करेंगे।
दोनों की गठबंधनों ने अपने तौर पर तैयारी की है। एनडीए के सभी विधायकों को सेंधमारी रोकने के लिए रेडिसन ब्लू होटल में ठहराया गया है। सभी विधायक सुबह 9 बजे पूरी तरह से तैयार रहेंगे और बस से एक साथ विधानसभा की ओर रवाना होंगे। सूत्रों के मुताबिक विधानसभा पहुंचने के बाद सभी विधायक एक साथ एकत्र होंगे और अंतिम रणनीति पर चर्चा करेंगे। इसके बाद सभी विधायक बारी-बारी से मतदान करेंगे। वहीं कांग्रेस के विधायक एक साथ होटल बीएनआर चाणक्या में नाश्ता करने के बाद विधानसभा के लिए बस से रवाना होंगे। सुबह 10 बजे तक कांग्रेस के सभी विधायक विधानसभा पहुंच जाएंगे। कांग्रेस के कई विधायक बीएनआर में ही ठहरे हुए है जहां कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा ने अपना डेरा जमाया हुआ है।
जेएमएम ने मतदान में क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और जेएमएम के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे को पार्टी का एजेंट बनाया गया है यहीं विधायकों के बैलेट पेपर चेक करेंगे। पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर और फागू बेसरा को पोलिंग एजेंट नियुक्ति किया गया है, जो मतदान प्रक्रिया के दौरान विधायकों की गतिविधियों और मतदान की औपचारिकता पर नजर रखेंगे। आरजेडी के चार विधायकों की जिम्मेदारी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भोला यादव को दिया गया है। वे पोलिंग एजेंट के साथ-साथ काउंटिंग एजेंट की भूमिका भी निभाएंगे। वहीं माले ने मतदान और मतगणना प्रक्रिया की निगरानी के लिए गायत्री मंडल और हलधर महतो को पोलिंग व काउंटिंग एजेंट बनाया है।
इन परिस्थितियों में रद हो सकता है वोट
मतदान के दौरान निर्दलीय विधायक को छोड़कर सभी विधायकों को अपने पार्टी एजेंट को वोट दिखाना है। इसके तहत अपने मतपत्र पर निशान लगाने के बाद और मत पेटी में डालने से पहले अपने दल के प्राधिकृत एजेंट को चिह्नित पत्र दिखाना है। ऐसा नहीं करने पर उसका वोट रद हो जाएगा।
साथ ही प्रत्येक विधायक को अपनी पसंद के उम्मीदवारों की वरीयता के वोट मतपत्र में देने होंगे। इसके लिए उन्हें चुनाव आयोग द्वारा प्रदान किए गए एक विशेष पेन का उपयोग करना होगा। यदि वे किसी अन्य पेन का उपयोग करते हैं तो उनका वोट रद हो सकता है। मतपत्र अपूर्ण रहने पर भी वोट रद हो सकता है।
यह है वोट दिखाने से मना करने या दिखाए बिना वोट डालने का नियम
यदि किसी राजनीतिक दल का विधायक अपने दल के प्राधिकृत एजेंट को अपना चिह्नित मतपत्र दिखाने से मना करता है या नहीं दिखाता है अथवा किसी अन्य दल के प्राधिकृत एजेंट को अपना चिह्नित मतपत्र दिखाता है तो निर्वाची अधिकारी उस विधायक को जारी किया गया मतपत्र वापस ले लेगा और उस मतपत्र के पिछले भाग पर ‘रद – मतदान पद्धति का उल्लंघन’’ लिखने के बाद उसे एक अलग लिफाफे में रख देगा।
इस मत की गणना नहीं होगी। यदि ऐसे मतपत्र को वापस लेने से पहले ही विधायक उसे मत पेटी में डाल देता है तो ऐसे मतपत्रों की गणना के समय निर्वाची पदाधिकारी सर्वप्रथम उस मतपत्र को अलग कर देंगे और उसकी गणना नहीं की जाएगी।
विधानसभा में क्या है दलगत स्थिति?
सत्तारूढ़ गठबंधन
झामुमो : 34
कांग्रेस : 16
राजद : 04
भाकपा माले : 02
कुल : 56
एनडीए
भाजपा : 21
आजसू पार्टी : 01
जदयू : 01
लोजपा-आर : 01
कुल : 24
किसी प्रत्याशी की जीत के लिए आवश्यक मत : 28
ऐसे होता है आवश्यक मतों के कोटा का निर्धारण
ऐसे चुनाव में जहां एक से अधिक सीटें भरी जानी हों, प्रत्येक मतपत्र का मूल्य 100 माना जाता है और कोटा विधानसभा के कुल सदस्यों के मतपत्रों की संख्या को जोड़कर और रिक्तियों की संख्या से एक अधिक संख्या से भाग देकर निर्धारित किया जाता है और शेषफल को अनदेखा करते हुए भागफल में एक जोड़ दिया जाता है। परिणामी संख्या कोटा होती है।
उदाहरण के लिए, झारखंड में दो सीटों पर चुनाव होना है और मतदान में भाग लेने वाले मतदाताओं की कुल संख्या 81 है, तो आवश्यक कोटा 2701 होगा। इस तरह प्रत्येक प्रत्याशी को कम से कम 2701 वोट या 28 मतदाताओं का पहली वरीयता का मत प्राप्त करना होगा।
द्वितीय वरीयता का मत होगा महत्वपूर्ण
चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास दो प्रत्याशियों की जीत के लिए आवश्यक कुल 56 मत ही होने के कारण द्वितीय वरीयता का मत महत्वपूर्ण हो जाएगा।
झामुमो अपने प्रत्याशी को 28 से अधिक प्रथम वरीयता का मत दिलाता है तो अधिशेष मतों के द्वितीय वरीयता के मत महत्वपूर्ण हो जाएंगे, क्योंकि ये प्रथम वरीयता में गिने जाएंगे। हालांकि, द्वितीय वरीयता का यह मत अन्य दोनों प्रत्याशियों में से किसी को भी मिल सकता है। क्रास वोटिंग की संभावना यहीं बनेगी।







