रांचीः जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी मामले में शामिल कंपनी बिंसिस के निदेशक अरुण शर्मा है जिन्हें एक दिन पहले ही रांची पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है। वहीं गड़बड़ी में शामिल पाई गई एक और नई कंपनी आईसीएन इंडिया के निदेशक मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह हैं। इन दोनों आरोपियों से अरुण कुमार और आरके सिंह ने करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति अर्जित की। इनमें बिहार में शिक्षण संस्थान, पुणे में होटल और दिल्ली-गुरुग्राम में जमीन-मकान शामिल हैं। अरुण कुमार ने मुंबई स्थित अपने फिल्म निर्माण संस्थान के जरिए फिल्म निर्माण में पैसा लगाने और नोएडा में शूटिंग के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार से सब्सिडी भी ली। इन लोगों ने 2019 में सेटर्स नामक फिल्म भी बनाई। उनके भाई श्रीकांत उर्फ लल्लू को वर्ष 2011 के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा लीक मामले में सीबीआई ने आरोपी बनाया था।
अरुण ने रक्षा अनुसंधान संगठन की परीक्षाओं में भी किया घपला
सीआईडी को बताया गया है कि अरुण कुमार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की परीक्षाओं में अधिकारी महेंद्र कपूर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से पास कराया। सैन्य अभियंता सेवा, पुणे की वर्ष 2021-22 की परीक्षा में करीब 300 अभ्यर्थियों के उत्तर पत्रकों में छेड़छाड़ की, जबकि दिल्ली में जेएनयू के समीप आयोजित राष्ट्रीय प्रतिरक्षा अनुसंधान संस्थान की वर्ष 2020 की परीक्षा में करीब 20 अभ्यर्थियों को इसी तरह नौकरी दिलाई गई। झारखंड में तीन जुलाई 2022 को आयोजित जेएसएससी कनीय अभियंता परीक्षा का प्रश्न पत्र तीन दिन पहले ही लीक कर बिहार-झारखंड के करीब 700 अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इस मामले में अरुण कुमार के सहयोगी अभिषेक कुमार की गिरफ्तारी हुई थी।
जबकि अरुण कुमार भाग गया था। इसी तरह 28 जनवरी 2024 की स्नातक स्तरीय परीक्षा में भी अरुण कुमार और आरके सिंह ने राजस्थान के परीक्षा माफिया गिरोह के साथ मिलकर बिहार के गया- औरंगाबाद में प्रश्न पत्र रटवाये, जिसके बाद यह परीक्षा भी रद्द हुई। वर्ष 2017 में बिहार के नवीनगर स्थित रेल भर्ती परीक्षा और वर्ष 2019 में बिहार सिपाही भर्ती से जुड़े 14 करोड़ रुपए के कथित गबन मामले में भी अरुण कुमार का नाम सामने आया, जिसमें शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही गई है।
परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता को थी गड़बड़ियों की जानकारीः रणवीर सिंह
टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने बताया कि जितनी तरह की गड़बड़ियां होती थीं, उनकी जानकारी परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को थी। वह जानती थी कि सभी काम उसके लालपुर स्थित आवासीय कार्यालय में होता था। श्वेता गुप्ता को एसीएफ, एफआरओ के इंटरव्यू और 14वीं जेपीएससी परीक्षा के संचालन और निगरानी का काम तत्कालीन अध्यक्ष ने सौंपा था। श्वेता गुप्ता ने ही 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की आंसर सीट व्हाट्सएप पर उसके कर्मी उस्मान और पीके सिंह को भेजी थी, ताकि ओएमआर सीट में गड़बड़ी की जा सके। चयनित अभ्यर्थी की ओएमआर शीट स्ट्रांग रूम से निकाल कर वह लोगों को देता था, जिसके बाद खाली छोड़े गए गोलों को भर कर उसके अंक बढ़ा दिए जाते थे। अभय तिवारी के उम्मीदवार हजारीबाग के अजीत यादव, रांची की नीतू कुमारी, दीपशिखा कुमारी, पलामू के संतोष राम, चतरा के संजीत यादव समेत हजारीबाग के वीरेन्द्र कुमार यादव और शशि कुमार समेत कुछ अन्य लोगों के अंक उसने बढ़वाए। अभय तिवारी और धर्मेन्द्र ने कहा था एफआरओ के एक अभ्यर्थी से आठ से दस लाख रुपए मिलेंगे।
रामवीर सिंह ने बताया कि उसे एफआरओ पीटी परीक्षा के तुरंत बाद अभय तिवारी, धर्मेन्द्र और आनंद और रवि ने 15 नाम दिए थे। उन्हें सफल कराना था। उसने मुख्य परीक्षा की कॉपी आयोग से निकाल उन लोगों को दिए, जिसके जवाब उन लोगों ने रांची और हजारीबाग के अलग-अलग स्थानों पर लिखवाए।
डॉ जमाल से टीडीपीएल कनेक्शन पर सवाल, बोले- आरोप तथ्य से परे
जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी के बुलावे पर बुधवार को जेपीएससी के पूर्व सदस्य डॉ जमाल अहमद सीआईडी कार्यालय पहुंचे। सीआईडी ने उनका बयान दर्ज किया। डॉ जमाल अहमद ने किसी भी गड़बड़ी में अपनी भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे पर उन्हें असहमति होती थी, आयोग की बैठकों में वह अपनी बात मजबूती से रखते थे। टीडीपीएल कंपनी के चयन में किसी तरह की गड़बड़ी या उसके माध्यम से छात्रों की गलत तरीके से नियुक्ति की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को तथ्यों से परे बताया। उल्लेखनीय है कि टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने डॉ जमाल अहमद समेत आयोग के अन्य सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि सभी मिलकर गलत तरीके से भर्तियां कराते थे। इंटरव्यू में अध्यक्ष के आदेश पर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से अंक दिए जाते थे।हजारीबाग के एक एजेंट के माध्यम से पूरा खेल संचालित होने का भी आरोप लगाया गया था। इस मामले में सीआईडी इससे पहले जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ कर चुकी है। अब आयोग की एक अन्य पूर्व सदस्य डॉ अनिमा हांसदा से भी पूछताछ की जाएगी।
मुख्य सचिव कार्यालय के कर्मी धर्मेंद्र से भी पूछताछ
सीआईडी ने मुख्य सचिव कार्यालय के कर्मी धर्मेंद्र पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। रिमांड की अवधि बढ़ाए जाने के बाद उससे दोबारा पूछताछ की जा रही है। बुधवार को सीआईडी ने अन्य आरोपियों के बयानों के आधार पर धर्मेंद्र से कई सवाल पूछे। उससे पूछा गया कि पूर्व मुख्य सचिव एल खियांग्ते से उसके कैसे संबंध थे। टीडीपीएल और बिसिस कंपनी के संपर्क में वह कैसे आया और दोनों से पैसों का लेन-देन कब और किस माध्यम से हुआ। पूछताछ में धर्मेंद्र ने कहा कि एल खियांग्ते मुख्य सचिव थे, तभी से वह उनके संपर्क में था।
पांच दिनों की रिमांड पर लिए गए बिंसिस के निदेशक
जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोप में मुंबई से गिरफ्तार बिंसिस कंपनी के निदेशक अरुण कुमार को सीआईडी ने बुधवार को पांच दिनों की रिमांड पर लिया। उससे जेएसएससी की कनीय अभियंता परीक्षा के पेपर लीक मामले में पूछताछ की जा रही है। सीआईडी अरुण कुमार से अभय तिवारी, धर्मेंद्र और जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से उसके संबंधों को लेकर भी जानकारी जुटा रही है। कनीय अभियंता परीक्षा के पेपर लीक मामले में नामकुम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की जांच के लिए रांची पुलिस ने एसआईटी गठित की थी। अरुण कुमार इस मामले में भी आरोपी था और अब उसकी गिरफ्तारी के बाद सीआईडी ने उसे रिमांड पर लिया है। जेएसएससी और जेपीएससी से जुड़े मामलों में दोनों एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही है।








