पटनाः बिहार के चर्चित IAS अधिकारी संजीव हंस के खिलाफ सीबीआई ने एक और केस दर्ज किया है। रिश्वतखोरी मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संजीव हंस पर बिल्डर कंपनी से एक करोड़ रुपया घूस लेने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। इस मामले में सीबीआई ने वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। इस मामले में 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में हवाला के जरिए पैसे ट्रांसफर होने की बात सामने आई है और एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है।उपभोक्ता मामलों के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के निजी सचिव रहे संजीव हंस पर एक करोड़ रुपए घूस लेने का आरोप लगा है।जानकारी के मुताबिक, CBI ने IAS अधिकारी संजीव हंस समेत 8 लोगों के खिलाफ एक करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में नियमित मामला दर्ज किया है। अन्य लोगों में विपुल बंसल, अनुभव अग्रवाल, पुष्पराज बजाज, शादाब खान, देवेंद्र सिंह आनंद, मुकुल बंसल और मैसर्स ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स के एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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क्या है आरोप?
आरोप है कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (एनसीडीआरसी) में एक बिल्डर के पक्ष में फैसला कराने के लिए यह घूस ली गई थी। CBIको मिली जानकारी के अनुसार, संजीव हंस ने आरएनए कॉरपोरेशन से जुड़े विपुल बंसल और अन्य के साथ मिलकर ईस्ट एंड वेस्ट बिल्डर्स के प्रमोटरों से अनुकूल आदेश दिलाने के लिए रिश्वत की मांग की और उसे स्वीकार किया।बताया गया है कि विपुल बंसल ने संजीव हंस की मुलाकात RNA समूह के प्रमोटर अनुभव अग्रवाल से कराई थी, जहां एक करोड़ रुपए घूस देने पर सहमति बनी। जांच में सामने आया है कि इसके बाद संजीव हंस ने आयोग में बिल्डर के पक्ष में सुनवाई की तारीखें तय कराने और एक प्रमोटर की गिरफ्तारी टालने में मदद की। इसके एवज में पूरी रकम किस्तों में दी गई।
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इन लोगों की भी थी अहम भूमिका
मामले में शादाब खान और पुष्पराज बजाज की भूमिका भी अहम बताई जा रही है, जो कथित तौर पर रकम के लेनदेन और हवाला के जरिए रकम ट्रांसफर करने में शामिल थे। CBI के अनुसार, 8 अगस्त 2019 को 16 लाख रुपए बैंक के जरिए एक खाते से दूसरे खाते में भेजे गए, जबकि 25 लाख रुपए नकद हवाला के माध्यम से दिए गए।बाकी के 60 लाख रुपए भी हवाला नेटवर्क के जरिए पहुंचाये जाने की बात सामने आई है।







