रांचीः झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा की सुरक्षा में लगी गाड़ी शुक्रवार शाम को दुर्घटना का शिकार हो गई। खूंटी से जमशेदपुर जाते समय चौका के समीप अर्जुन मुंडा के कारकेड की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में पूर्व मुख्यमंत्री बाल-बाल बच गए। अर्जुन मुंडा ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि इस हादसे में उन्हें और उनकी सुरक्षा में तैनात जवान को कोई क्षति नहीं हुई है।
आज खूंटी से जमशेदपुर जाने के क्रम में एनएच-33 स्थित चौका के समीप मेरे सुरक्षा काफिले (कारकेड) में शामिल एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ईश्वर का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि इस दुर्घटना में मुझे और मेरी सुरक्षा में तैनात किसी भी जवान को कोई क्षति नहीं पहुंची। https://t.co/59SLvzwh8n
— Arjun Munda (@MundaArjun) November 6, 2026
घटना के बाद अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षाकर्मियों को उपलब्ध कराए जा रहे जर्जर वाहनों की स्थिति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा - खराब वाहनों के कारण सुरक्षाकर्मियों की जान जोखिम में है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
मेरे कार्यालय द्वारा इस संबंध में बार-बार संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर वाहनों की जर्जर स्थिति, बार-बार उत्पन्न होने वाली तकनीकी खराबियों तथा सुरक्षा पर पड़ रहे प्रभाव से अवगत कराया गया है। वाहन संबंधी पत्राचार का विवरण निम्नलिखित है:
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सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराए जा रहे वाहनों की स्थिति खराब
अर्जुन मुंडा ने बताया कि वह खूंटी से जमशेदपुर जा रहे थे। इसी दौरान उनके सुरक्षा काफिले में शामिल एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में किसी के हताहत नहीं होने पर उन्होंने ईश्वर के प्रति आभार जताया। साथ ही कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए उपलब्ध कराए जा रहे वाहनों की स्थिति बेहद खराब है।यह केवल उनकी सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि दिन-रात ड्यूटी करने वाले सुरक्षाकर्मियों के जीवन से जुड़ा गंभीर विषय है।
छह बार पत्र लिखकर अधिकारियों को कराया अवगत
अर्जुन मुंडा ने कहा - उनके कार्यालय की ओर से वाहनों की जर्जर स्थिति, बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों और सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर संबंधित अधिकारियों को छह बार पत्र लिखे गए। इनमें 28 जुलाई 2024 को पत्रांक 10453, 22 अगस्त 2024 को 10476, 19 अप्रैल 2025 को 10740, 11 सितंबर 2025 को 10905, 9 मार्च 2026 को 11133 तथा 29 जून 2026 को 11298 शामिल हैं। साथ ही गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने भी 14 मार्च 2026 को पत्रांक 08/सुरक्षा(II)-01/2025, ज्ञापांक 1645 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया था। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा से जुड़ी गंभीर जिम्मेदारी है। सरकार को इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सुरक्षा काफिले में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित और तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने चाहिए।
— Arjun Munda (@MundaArjun) November 6, 2026
मरम्मत के बाद फिर आने लगती है तकनीकी खराबी
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जर्जर वाहनों की केवल सामान्य मरम्मत कर उन्हें दोबारा सुरक्षा काफिले में लगा दिया जाता है। कुछ ही समय बाद उनमें फिर तकनीकी खराबियां आने लगती हैं।उन्होंने कहा - सुरक्षा काफिले में अत्यंत पुराने और जर्जर वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अर्जुन मुंडा के अनुसार, वाहनों में सायरन और झंडे जैसी पहचान की व्यवस्था भी नहीं है। इससे दूसरे वाहन चालकों को सुरक्षा काफिले का पता नहीं चल पाता और कई बार अन्य वाहन कारकेड के बीच में प्रवेश कर जाते हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने कहा - शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो, जब इन वाहनों में कोई तकनीकी समस्या सामने नहीं आती हो।
सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा से जुड़ी गंभीर जिम्मेदारी है। सरकार को इस विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए सुरक्षा काफिले में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित और तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने चाहिए।
— Arjun Munda (@MundaArjun) November 6, 2026
बोले- क्या बड़ी दुर्घटना के बाद खुलेगी अधिकारियों की नींद?
अर्जुन मुंडा ने सवाल उठाया कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी? उन्होंने राज्य सरकार से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की। कहा कि सुरक्षा व्यवस्था महज औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों के जीवन की रक्षा से जुड़ी गंभीर जिम्मेदारी है। सरकार को सुरक्षा काफिले के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित और तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि सुरक्षाकर्मियों की जान जोखिम में न पड़े।







