रांचीः झारखंड में आयोजित 15वीं अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का समापन सोमवार को हो गया। समापन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए प्रतियोगिता की शुरुआत से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि करीब 15 साल पहले उनके कार्यकाल के दौरान ही इस प्रतियोगिता की शुरुआत हुई थी। इतने वर्षों बाद इस आयोजन को आगे बढ़ते देखना खेल और पुलिस बल के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेल केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, एकाग्रता, धैर्य और आत्मविश्वास को भी मजबूत करता है। तीरंदाजी जैसे खेल में लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना और लगातार अभ्यास करना बेहद जरूरी होता है। ये गुण पुलिसकर्मियों के पेशेवर जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अखिल भारतीय पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता पुलिस बलों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर प्रदान करती है। इस तरह के आयोजनों से खिलाड़ियों के बीच आपसी तालमेल बढ़ता है और खेल के प्रति रुचि को प्रोत्साहन मिलता है।
झारखंड की पहचान देश में तीरंदाजी के क्षेत्र में भी रही है। राज्य के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। ऐसे में पुलिस तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
समापन समारोह के दौरान प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के प्रदर्शन और खेल भावना को भी महत्व दिया गया। इस तरह की प्रतियोगिताएं पुलिसकर्मियों को अपनी नियमित जिम्मेदारियों के साथ खेल प्रतिभा निखारने का मंच देती हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयान ने प्रतियोगिता की शुरुआत से जुड़ी पुरानी यादों को फिर चर्चा में ला दिया। उन्होंने अपने संबोधन में 15 साल पहले हुई शुरुआत का उल्लेख करते हुए इस आयोजन की निरंतरता को रेखांकित किया। इस प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।







