रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में सीआईडी (CID) ने अदालत के समक्ष चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। CID ने गिरिडीह निवासी और जमशेदपुर के फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार के खिलाफ अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, संजय कुमार ने पटना की कृष्णा डिफेंस एकेडमी के संचालक राकेश रंजन के साथ मिलकर इस धांधली की पूरी पटकथा रची थी। गिरोह ने परीक्षा पास कराने की गारंटी देकर अभ्यर्थियों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र और खाली चेक जमा करवा लिए थे।

इसके बाद 20 सितंबर 2024 को पटना के गांधी मैदान और बुद्ध स्मृति पार्क में अभ्यर्थियों का जुटान कराया गया, जहां से उन्हें एक गुप्त ठिकाने पर ले जाया गया। जांच में सामने आया कि गुप्त ठिकाने पर अभ्यर्थियों को पेपर-1, पेपर-2 और पेपर-3 के कुल 370 प्रश्नों के तीन सेट महज 3 घंटे के भीतर रटवाए गए थे। साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से प्रश्न-उत्तर रटवाने के तुरंत बाद प्रश्नपत्रों को मौके पर ही जलाकर नष्ट कर दिया गया।
CID ने जांच में अनिल कुमार, विजय यादव, उत्तर कुमार, त्रिभुवन यादव, रामकृष्ण कुमार सिंह और अमित कुमार सहित कई ऐसे अभ्यर्थियों की पहचान की है, जिन्हें इस लीक का सीधा लाभ मिला। इसके अलावा सफल अभ्यर्थियों से प्राप्त लेनदेन के वित्तीय ब्योरे भी CID के हाथ लगे हैं।
दूसरी ओर, रांची स्थित पतंजलि IAS एकेडमी के संचालक और FRO मुख्य परीक्षा व JPSC परीक्षाओं में धांधली के आरोपी संजीत कुमार को झटका लगा है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने संजीत कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी है। संजीत को 13 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
सुनवाई के दौरान सीआईडी ने बैंक ट्रांजैक्शन और संलिप्तता के ठोस सबूत अदालत में पेश किए, जिसके बाद कोर्ट ने परीक्षा व्यवस्था की शुचिता और कड़े कानूनों का हवाला देते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।




