रांची: भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) रांची में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य की असमय मृत्यु के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने संज्ञान लिया है। मामले में छात्र को समय पर इलाज नहीं मिलने और संस्थान के प्रशासन की कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाये गये हैं। छात्र की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या थे, इसकी जांच कराने की बात कही गयी है।
बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले छात्र आदित्य की मौत के बाद कैंपस में तनाव का माहौल है और साथ छात्रों ने जमकर हंगामा किया है। जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 11ः30 बजे तक आदित्य के कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर परेशान दोस्तों ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। कमरे के भीतर आदित्य मृत अवस्था में मिला। इसके बाद साथी छात्र उसे तुरंत एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, आदित्य की परीक्षा चल रही थी। पेपर खराब होने के कारण आत्महत्या की आशंका जतायी जा रही है।

मौत के बाद छात्रों का हंगामा
आदित्य की मौत के बाद छात्रों ने हंगामा शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि आदित्य ने आत्महत्या की कोशिश की थी। छात्रों ने एंबुलेंस की उपलब्धता और ऑक्सीजन सुविधा पर सवाल उठाये। उनका दावा है कि समय पर जरूरी चिकित्सा सहायता मिलती, तो आदित्य की जान बच सकती थी। हंगामे की सूचना पर पुलिस हॉस्टल पहुंची और स्थिति संभालने में जुट गई। मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है। फिलहाल, आदित्य की मौत के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। सदर DSP संजीव बेसरा के मुताबिक, पुलिस मामले की जांच कर रही है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी मौत की वजह
छात्र की मौत के मामले में संस्थान की कथित लापरवाही और समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने से जुड़े आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामले में सामने आये आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।





