लोहरदगा: किस्को प्रखण्ड के गोसाई टोली अखाड़ा और महुगांव में परंपरा, संस्कृति एवं सामाजिक समरसता का दिया संदेश।आदिवासी समाज के प्रकृति एवं सांस्कृतिक पर्व करम पर्व के पावन अवसर पर जिला कांग्रेस कमिटी के जिलाध्यक्ष एवं चाला इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर सुखैर भगत के किस्को प्रखण्ड मुख्यालय स्थित गोसाई टोली अखाड़ा और ग्राम महुगांव में आदिवासी माता-बहनों के बीच आदिवासी सांस्कृतिक साड़ियों का वितरण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, संस्कृति एवं प्रकृति के प्रति आस्था को सम्मान देते हुए पर्व की खुशियों को साझा किया।


सुखैर भगत ने कहा की “करम पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी आदिवासी सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ अटूट रिश्ते का प्रतीक है।” करम पर्व हमारी पुरखों से चली आ रही उस महान परंपरा का हिस्सा है, जिसमें प्रकृति, भाई-बहन के प्रेम, परिवार की खुशहाली और सामुदायिक एकता का विशेष महत्व है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की प्रेरणा देता है। आदिवासी माता-बहनों की पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, नृत्य और अखाड़ा संस्कृति हमारे समाज की पहचान और गौरव हैं। करम पर्व के अवसर पर सांस्कृतिक साड़ियों का वितरण केवल एक उपहार नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, सम्मान और स्वाभिमान के प्रति हमारी श्रद्धा का प्रतीक है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि समाज की परंपराओं को सम्मान मिले और हर माता-बहन के चेहरे पर खुशी एवं आत्मसम्मान की मुस्कान बनी रहे। करम पर्व हमें प्रकृति की रक्षा, आपसी भाईचारे, सहयोग और सामाजिक एकजुटता का संदेश देता है। आइए, हम सभी मिलकर अपनी संस्कृति को संजोएँ, अपनी परंपराओं को मजबूत करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, सम्मानपूर्ण एवं खुशहाल समाज का निर्माण करें।सुखैर भगत ने उपस्थित सभी माता-बहनों एवं ग्रामीणों को करम पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना की।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे—
जिला महासचिव सलीम बड़े अंसारी, जिला सोशल मीडिया प्रभारी प्रकाश उराँव, प्रखण्ड अध्यक्ष यूनुस अंसारी, अनीता लकड़ा, अनीता उराँव, लूईस खलखो, पूर्व मुखिया सुखमनी लकड़ा, पंचायत समिति सदस्य राजमुनी उराँव, बसंती भगत, मुनिया उराँव, अनुपा उराँव, सीताराम उराँव, उमेश उराँव, घुड़ा उराँव, जग्गू पुजार, सुमराज पहान, देवठान पुजार, दीपक उराँव, सुनीता तिग्गा सहित काफी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।







