रांचीः खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन (एमएमडीआर) कानून में संशोधन के खिलाफ झारखंड अब केंद्र के सामने सीधे अपना पक्ष रखेगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 17 सितंबर से दिल्ली में प्रस्तावित बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर शामिल होंगे। बैठक में वह संशोधित एमएमडीआर कानून, खासकर नई धारा 9डी के प्रावधानों से झारखंड को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान और राज्य के खनिज अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे।
राजस्व हानि का आकलन
राज्य सरकार का आकलन है कि संशोधन लागू होने से झारखंड को चालू वित्तीय वर्ष में खनिजयुक्त भूमि पर सेस से अनुमानित करीब 14 हजार करोड़ रुपये के राजस्व से हाथ धोना पड़ सकता है। राज्य सरकार का तर्क है कि खनन गतिविधियों का सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक दुष्प्रभाव झारखंड को झेलना पड़ता है। ऐसे में खनिज संसाधनों से होने वाली आय पर राज्य का अधिकार सीमित करना वित्तीय संघवाद के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
झारखंड सरकार केंद्र के सामने 2024 के सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले का भी हवाला देगी। राज्य सरकार ने इसी फैसले के आधार पर खनिजयुक्त भूमि पर सेस लगाने के लिए झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड-सेस विधेयक विधानसभा से पारित कराया था। सरकार का दावा है कि वर्ष 2026-27 में इस सेस से करीब 14 हजार करोड़ रुपये राजस्व मिलने का अनुमान था।
बकाया राशि का सवाल
एमएमडीआर संशोधन के असर से झारखंड को कोयला कंपनियों से मिलने वाली करीब 1,36,042 करोड़ रुपये की बकाया राशि पर भी राज्य सरकार ने चिंता जताई है। वित्त मंत्री के अनुसार, संशोधित कानून पुराने कानूनों और न्यायालय के आदेशों पर भी प्रभाव डालता है। इसलिए बैठक में इस बकाया राशि की वसूली के अधिकार का मुद्दा भी उठाया जाएगा।

राजकीय अधिकार पर केन्द्र का नियंत्रण
झारखंड सरकार की आपत्ति केवल राजस्व तक सीमित नहीं है। राज्य का कहना है कि एमएमडीआर कानून की धारा 2 और 3 में ‘मिनरल वाली जमीन’ को शामिल करने तथा धारा 9डी जोड़े जाने से खनिजयुक्त भूमि पर राज्य के अधिकार प्रभावित होंगे। राज्य सरकार इसे संघीय ढांचे और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता से जुड़ा गंभीर विषय मान रही है।
कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर पहले ही अधिकारियों को संशोधन के वित्तीय प्रभाव पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने और कानूनी राय लेने का निर्देश दे चुके हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस मुद्दे पर राज्य के हितों की रक्षा के लिए कानूनी और लोकतांत्रिक दोनों स्तरों पर कदम उठाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में 17 सितंबर की दिल्ली बैठक को झारखंड की ओर से एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ औपचारिक और मजबूती से पक्ष रखने की पहली बड़ी पहल माना जा रहा है।





