गिरिडीह : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी ) के प्रदेश सह मंत्री मंटू मुर्मू पर बीते हुए जानलेवा हमले, जातिगत अपमान और उत्पीड़न मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी ) ने गंभीरता से लिया है। इसे लेकर आयोग ने गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर पूरे मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी सात दिनों के अंदर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। आयोग की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में कहा गया है कि मंटू मुर्मू ग्राम जोधपुर, थाना ताराटांड़, जिला गिरिडीह नै 23 अगस्त 2026 को शिकायत भेजी थी। शिकायत में हमले, जातिगत अपमान और उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए मामले की जांच/अन्वेषण करने का निर्णय लिया है। आयोग ने गिरिडीह एसपी से आरोपों और मामले में अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित सूचना सात दिनों के अंदर उपलब्ध कराने को कहा है।
…तो जारी होगा जवाब सम्मन :
कार्रवाई से संबंधित जवाब नहीं भेजने पर एसपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नोटिस में आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में जवाब प्राप्त नहीं होने पर आयोग संविधान के अनुच्छेद 338 क के तहत प्राप्त सिविल न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग कर सकता है। इसके तहत संबंधित अधिकारी को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के लिए सम्मन जारी किया जा सकता है। आयोग का यह कदम मामले की गंभीरता को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब गिरिडीह पुलिस की ओर से आयोग को दी जाने वाली रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।

ये मामला है :
बता दें कि जेपीएससी, जेएसएससी आदि परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के खिलाफ अभाविप की ओर से गत 21 अगस्त को गिरिडीह झंडा मैदान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन के दौरान कथित झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मंटू मुर्मू सहित अन्य छात्रों के ऊपर जानलेवा हमला किया था।





