साहिबगंजः साइबर अपराधियों ने बरहरवा निवासी गौतम चंद्र दास को दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 10 किस्तों में 1.20 करोड़ ठग लिए। गौतम ने बरहरवा थाने में केस दर्ज कराया है। उन्होंने बताया कि ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और फर्जी कोर्ट का दृश्य तैयार कर वीडियो कॉल पर उनकी पेशी कराई। लगातार दवाब बनाने के कारण उन्होंने बेटी की शादी के लिए रखी रकम ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दी। केस से बचने के लिए अलग-अलग खातों में करीब 10 आरटीजीएस के माध्यम से पैसे ट्रांसफर किये गए। मामले का खुलासा रिश्तेदार को जानकारी देने पर हुआ। पुलिस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने घर पहुंचकर बयान दर्ज किया।
क्या कहा पीड़ित व्यक्ति ने
पीड़ित गौतम चंद्र दास ने पुलिस को बताया कि उसने यह रकम अपनी बेटी की शादी के लिए काफी मुश्किल से जमा की थी। ठगी का अहसास होने के बाद उसने पहले एक रिश्तेदार को घटना की जानकारी दी और फिर पुलिस से संपर्क किया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए साहिबगंज एसपी अमित कुमार सिंह ने जांच के लिए मुख्यालय डीएसपी सह साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी रविकांत साव के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की।

इस मामले की जांच के लिए बरहरवा पहुंचे मुख्यालय डीएसपी सह साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी रविकांत साव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में करीब 10 बार आरटीजीएस के जरिए कुल 1.20 करोड़ रुपये मंगाए गए। जांच के अनुसार, 20 जून 2026 को 50 लाख रुपये का पहला बड़ा लेनदेन हुआ था। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में रकम ट्रांसफर कराई गयी। साथ ही बताया गया कि 24 अगस्त को पांच लाख रुपये का अंतिम लेनदेन किया गया।
कैसे फंसा व्यक्ति
पीड़ित के अनुसार, जून माह में उसके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम प्रदीप सिंह बताते हुए खुद को सीबीआई का बड़ा अधिकारी बताया। उसने गौतम चंद्र दास से कहा कि उसके खिलाफ सीबीआई में एक गंभीर मामला दर्ज है और जल्द ही उसके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है।
इसके बाद कथित साइबर अपराधियों ने गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने का भय दिखाकर पीड़ित को मानसिक रूप से दबाव में लेना शुरू कर दिया। केस में राहत दिलाने और कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर उससे लगातार रकम की मांग की जाती रही।
वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कोर्ट में तीन बार पेशी
साइबर ठगी का तरीका यहीं नहीं रुका। साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। करीब दो महीने तक उसे वीडियो कॉल पर रहने और उनके निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया।
अपराधियों ने विश्वास पैदा करने के लिए बाकायदा फर्जी कोर्ट रूम तैयार किया। वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित की कथित तौर पर तीन बार फर्जी सीबीआई कोर्ट में पेशी कराई गयी। इस दौरान उसे कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और गिरफ्तारी का भय दिखाया गया। इसके बाद केस खत्म कराने अथवा कार्रवाई से बचाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई जाती रही।





