रांचीः झारखंड ऊर्जा निगम के 107 करोड़ रुपए के गबन मामले में सीआईडी ने बुधवार को रांची स्थिति विशेष अदालत में चार्जशीट दायर की। इसमें केनरा बैंक (निफ्ट परिसर शाखा, हटिया) के तत्कालीन सीनियर मैनेजर अमरजीत कुमार को मुख्य आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में कहा गयाद है कि अमरजीत कुमार ने बैंकिंग नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 9 करोड़ रुपए के सरकारी फंड की बंदरबांट और हेराफेरी में मुख्य भूमिका निभाई। मैनेजर को 12 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। अब सीआईडी ने उसके खिलाफ शिकंजा कस दिया है।
चार्जशीट के अनुसार, झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एंप्लॉइज मास्टर ट्रस्ट ने नौ करोड़ रुपये की राशि को सावधि जमा (FD) में रखने के उद्देश्य से सात राष्ट्रीयकृत बैंकों से कोटेशन आमंत्रित किए थे।
इसमें केनरा बैंक का कोटेशन भी शामिल था। उस समय अमरजीत कुमार निफ्ट परिसर स्थित केनरा बैंक शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक पद पर तैनात थे। आरोप है कि इस शाखा में 10 अप्रैल 2024 को नियम-कायदों को ताक पर रखकर फर्जी तरीके से खाता संख्या 120023985910 खोला गया।
इसके बाद इस फर्जी खाते में ऊर्जा विभाग से संबंधित नौ करोड़ रुपये जमा कराए गए, जिसे बाद में अलग-अलग तारीखों में संदिग्ध तरीके से निकाल लिया गया।
विभागीय जांच के दौरान फर्जी खाते में राशि ट्रांसफर होने का मामला उजागर होने पर कार्रवाई शुरू हुई। जांच में स्पष्ट हुआ कि अमरजीत ने बैंक की निर्धारित बैंकिंग प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए फर्जी खाता खोला और फर्जी एफडी तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाई।
गौरतलब है कि रांची के धुर्वा थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर वर्ष 2024 में सीआइडी थाने में कांड संख्या 42/2024 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले की गहन जांच के दौरान सीआइडी ने सरकारी खातों से अवैध निकासी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया और पश्चिम बंगाल से भी कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।







