पटनाः बिहार का सीमांचल इलाका आतंकी गतिविधियों को लेकर काफी संवेदनशील रहा है। पूर्णिया के रहने वाले संदिग्ध आतंकी मोहम्मद जफर को उत्तरप्रदेश के मेरठ शहर से पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी की सूचना के बाद उसके गांव रौटा थाना क्षेत्र के मीरगंज गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। माता-पिता और आसपास के लोगों को जफर के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की खबर पर भरोसा नहीं हो रहा है।

मदरसा के नाम पर चंदा वसूली का आरोप: मदरसा के नाम पर जफर वहां चंदा वसूली भी करता था। परिजनों का कहना है कि उसपर लगा हुआ आरोप गलत है, इसकी जांच होनी चाहिए लेकिन यूपी एटीएस ने कहा कि जफर मदरसा के नाम पर चंदा वसूली कर जैश-ए-मोहम्मद संगठन को पाकिस्तान भेजता था।
जैश-ए-मोहम्मद से ताल्लुकात: यूपी एटीएस का दावा है कि उसका लिंक जैश-ए-मोहम्मद से था। साथ ही वह उस आतंकी संगठन के लिए काम भी करता था। उसके जिहाद के साहित्य को वह मेरठ इलाके में फैलता था, जो काफी गंभीर मामला है। गांव में जफर का मकान बाहर से देखने में टूटा-फूटा दिखता है लेकिन मकान अंदर से आलीशान दिखता है।
पिता ने बताया बेकसूर: हालांकि जफर के माता-पिता ने आरोप को बेबुनियाद बताया है। उनके पिता ने कहा कि 5 साल की उम्र में ही पढ़ने के लिए जफर मेरठ स्थित मदरसा चला गया था और वह वहीं पर रहता था। बाद में मदरसा के लिए चंदा इकट्ठा करता था। पिछले दिनों मधेपुरा भी आया था। साजिश के तहत उसे फंसाया जा रहा है, वह बेकसूर है।
“वो तो पढ़ने के लिए गया था। वहीं पर मौलवी बना और हाफिज बना। कभी आज तक कुछ बुरा नहीं देखे। कभी कुछ गड़बड़ नहीं सुना। अचानक पता चला कि आतंकवादी होने के आरोप में पुलिस ने पकड़ लिया है। मदरसा के लिए चंदा इकट्ठा करता था लेकिन गलत नहीं करता था। हमारे बच्चे को फंसाया जा रहा है।”- जफर के पिता
क्या बोले पड़ोसी?: वहीं, पड़ोसी और ग्रामीणों को भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा है कि जफर आतंकी संगठन के लिए मदरसे के नाम पर पैसा इकट्ठा करता था और वह पैसा पाकिस्तान भेजता था। उन लोगों का कहना है कि जफर अपने गांव कभी-कभी आता था।
“जफर कम ही गांव आता था। जब भी आता था, सबसे मिलता-जुलता था लेकिन इस तरह की जानकारी कभी भी उन लोगों को नहीं हुई। हमें तो यकीन नहीं हो पा रहा है कि उसके आतंकी संगठन से ताल्लुकात हैं।”- जफर का पड़ोसी
एसपी ने क्या कहा?: सूचना मिलते ही रौटा थाना की पुलिस जफर के घर पर पहुंची और जांच कर रही है। इस बाबत पूछे जाने पर पूर्णिया के एसएसपी डॉक्टर शौर्य सुमन ने कहा, ‘अभी तक यूपी एटीएस के द्वारा कोई सूचना नहीं मिली है लेकिन हम लोग अपने स्तर से जांच करवा रहे हैं।’
पहले भी हुई थी कई संदिग्धों की गिरफ्तारी: सीमांचल में पहले भी कई संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं। 2012 में खाता हाट से एक संदिग्ध को एएनआई की टीम ने गिरफ्तार किया था। 2011 में एक अफगानी नागरिक को भी पूर्णिया जंक्शन से गिरफ्तार किया गया था। 2025 में कटिहार से भी कुछ संदिग्ध की गिरफ्तारी हुई थी। चूकि नेपाल और बांग्लादेश का बॉर्डर नजदीक होने के कारण यह इलाका काफी संवेदनशील रहा है।






