पटनाः भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में गठित जांच आयोग ने अपनी अंतरिम (इंटरिम) रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद बिहार की सम्राट सरकार ने पीड़ित परिवार के हित में बड़ा फैसला लिया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने X पर लिखा, “न्यायिक जांच के अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार द्वारा दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक परिजन को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी।”


क्या है मामला
बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून 2026 को भरत भूषण तिवारी की पुलिस कार्रवाई में मौत हुई थी। पुलिस का कहना था कि भरत ने पुलिस टीम पर अवैध हथियार से हमला किया। इसके बाद आत्मरक्षा में गोली चलाई गई। परिवार और कुछ ग्रामीणों ने इस कहानी पर सवाल उठाए और इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया था।
24 जुलाई को भरत के परिजन से मिले थे सीएम सम्राट
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 24 जुलाई को उनके परिवार से मुलाकात की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने परिजनों की बात सुनी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया था।सीएम ने इस मुलाकात की जानकारी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार इस संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। परिवार को न्याय दिलाने के लिए सरकार की ओर से हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।


मुख्यमंत्री से भरत तिवारी की मां आशा देवी, बहन रूबी तिवारी और भाभी सुमन देवी ने मुलाकात की थी। परिजनों ने इस दौरान घटना के बाद अपनी परेशानी और मामले से जुड़े आरोप मुख्यमंत्री के सामने रखे।सम्राट चौधरी ने परिवार को भरोसा दिलाया था कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में अब तक एक STF जवान को किया गया गिरफ्तार
भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अब तक पुलिस ने सिर्फ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। भोजपुर पुलिस ने इस कार्रवाई में शामिल STF जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया है।इस मामले में तत्कालीन SHO राजेश मालाकार पर भी कार्रवाई हुई है। उन्हें सस्पेंड किया जा चुका है। राजेश शर्मा को बाद में पटना में मद्य निषेध विभाग में डीएसपी की जिम्मेदारी दी गई थी। भरत तिवारी के परिवार की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद उन्हें फिर से लाइन क्लोज कर दिया गया।
इसके अलावा जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार पर भी प्रशासनिक कार्रवाई हुई। उन्हें पद से हटाकर पटना मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। इस तरह मामले में अब तक एक गिरफ्तारी हुई है, जबकि पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारियों पर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की जा चुकी है।







