डेस्कः अमेरिकी कोर्ट ने अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के खिलाफ सभी आपराधिक आरोप स्थायी रूप से खारिज कर दिए। उनके भतीजे सागर अदाणी व अदाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व सीईओ के खिलाफ धोखाधड़ी से जुड़े तीन आरोप भी खारिज हुए हैं। फैसला न्यूयार्क के जज निकोलस गैरॉफिस ने सुनाया। अब ये आरोप दोबारा नहीं लगाए जा सकेंगे।
हालांकि कोर्ट ने कहा, इसका मतलब आरोपों के सही या गलत होने पर फैसला नहीं है। न ट्रायल हुआ, न गवाही और न सबूतों को परखा गया। जज ने आरोप वापस लेन की न्याय विभाग की प्रक्रिया को बेहद असामान्य भी बताया है। उन्होंने कहा, फैसले को न्याय विभाग के निर्णय से सहमति न माना जाए। सुनवाई के दौरान अदाणी की नवंबर 2024 में अमेरिका के करीब 95 हजार करोड़ रुपए के निवेश और 15 हजार नौकरियां पैदा करने की घोषणा भी जांच के दायरे में आई। हालांकि जज ने माना कि घोषणा ने आरोप वापस लेने के फैसले को प्रभावित नहीं किया। पांच अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर कोर्ट ने फैसला नहीं दिया है। न्याय विभाग को इस पर 31 अगस्त तक जानकारी देनी है।
आरोप क्या थेः नवंबर 2024 के आरोपपत्र में अदाणी ग्रुप पर सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट के लिए भारतीय अफसरों को 2,500 करोड़ रुपए घूस देने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को गुमराह करने के आरोप लगाए गए थे।अडानी समूह और गौतम अडानी ने शुरुआत से ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था।
जज गराफिस का 47 पन्नों का आदेश: प्रक्रिया पर जताई चिंता
न्यू यॉर्क (ब्रुकलिन) के अमेरिकी जिला जज निकोलस गराफिस ने सोमवार को 47 पन्नों के अपने आदेश में न्याय विभाग की मांग को स्वीकार करते हुए आरोपों को “विथ प्रिज्युडिस” (With Prejudice) खारिज कर दिया। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिकी सरकार भविष्य में इन्हीं आरोपों पर गौतम अडानी के खिलाफ दोबारा मामला दर्ज नहीं कर सकती।
जज ने केस वापस लेने की प्रक्रिया सही नहीं मानी
मामला खारिज करने के बावजूद जज गराफिस ने न्याय विभाग के इस फैसले तक पहुँचने के तरीके की तीखी आलोचना की और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए: जज ने नोट किया कि न्याय विभाग के प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल आर. ट्रेंट मैककोटर ने मामले की जांच करने वाले एफबीआई (FBI), सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के अधिकारियों और मूल अभियोजकों से परामर्श किए बिना अडानी के वकीलों के साथ सीधे तालमेल बनाकर केस वापस लेने का फैसला किया। जज ने कहा- मुकदमा वापस लेने के फैसले में अनियमितताएं चिंताजनक हैं। मैककोटर ने जांच से जुड़े अनगिनत अधिकारियों की प्रोफेशनल राय को नजरअंदाज कर अपनी व्यक्तिगत राय को प्राथमिकता दी।







