20 लाख इनामी नक्सली रवींद्र गंझू लातेहार से गिरफ्तार, 4 पुलिसकर्मी की हत्या का है आरोपी, टेरर फंडिंग में NIA को थी तलाश

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July 13, 2026

20 लाख इनामी नक्सली रवींद्र गंझू लातेहार से गिरफ्तार, 4 पुलिसकर्मी की हत्या का है आरोपी, टेरर फंडिंग में NIA को थी तलाश

डेस्कः झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। लातेहार में CRPF ने कार्रवाई करते हुए 20 लाख रुपये के इनामी नक्सली रविंद्र गंझू को चंदवा से गिरफ्तार किया है। रविंद्र गंझू भाकपा माओवादी संगठन में रिजनल कमांडर है। उसके ऊपर झारखंड पुलिस ने 15 लाख और NIA ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। 22 नवंबर 2019 को लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र लुकूईया मोड के पास हमला कर 4 पुलिस कर्मियों की हत्या करने का मुख्य आरोपी है। रविन्द्र गंझू लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के हेसला मौजा के बांझीटोला का रहने वाला है।

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रवींद्र गंझू को इन मामलों में तलाश कर रही NIA:
NIA को नक्सली रविद्र गंझू की रांची शाखा में दर्ज कई कांड में तलाश रही है। पहला कांड एक करोड़ के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य सुधाकरण से जुड़ा हुआ है। उस वक्त गिरफ्तार सुधाकरण के सहयोगी गुमला निवासी प्रभु साव की निशानदेही पर लातेहार के गारू थाना क्षेत्र के रूप पंचायत क्षेत्र से हथियार व नक्सली साहित्य की बरामदगी हुई थी। दूसरा मामला चंदवा में चार पुलिसकर्मियों की हत्या से जुड़ा हुआ है। जहां 22 नवंबर 2019 को झारखंड पुलिस के पीसीआर वैन पर नक्सलियों ने हमला किया था जिन में चार पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। तीसरा मामला फरवरी 2022 में लातेहार-लोहरदगा सीमा पर स्थित बुलबुल जंगल में ऑपरेशन डबल बुल से संबंधित है। तब पेशरार के जंगल से सुरक्षा बलों ने भारी संख्या में हथियार की बरामदगी की थी। इस कांड को एनआइए ने जून 2022 में टेकाओवर किया था। इन दोनों ही कांडों की जांच NIA कर रही है। इस कांड में भी NIA को रवींद्र गंझू की तलाश है. रवींद्र गंझू पर राज्य के विभिन्न थानों में करीब 55 कांड दर्ज हैं।

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नक्सलवाद की आखिरी बड़ी कड़ी था रविंद्र गंझू
पिछले कुछ वर्षों में रांची समेत आसपास के आधा दर्जन जिलों में नक्सल गतिविधियों से काफी हद तक मुक्त हुआ है। कई बड़े नक्सली मारे गए, अनेक गिरफ्तार हुए और कई ने आत्मसमर्पण किया। इसके बावजूद रविंद्र गंझू लगातार पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसकी सक्रियता के कारण रांची, लोहरदगा, लातेहार, गुमला, पलामू, चतरा और आसपास के सीमावर्ती जंगलों में माओवादी संगठन अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा था। रविंद्र की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि इलाके में बचे माओवादी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में मदद मिलेगी।
बांझीटोला स्थित आवास को सील कर चुकी है NIA:
छानबीन के क्रम में ही NIA ने पूर्व में रवींद्र गंझू के लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र के हेसला मौजा के बांझीटोला स्थित आवास को सील किया था। एनआइए में जांच में पाया था कि उक्त घर लेवी-रंगदारी के पैसे से बनाए गए थे. उसका पूरा नाम मुकेश गंझू उर्फ रवींद्र गंझू उर्फ सुरेंद्र गंझू है। लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र के बांझीटोला हेसला में उसका अपना घर है।

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लेवी के पैसों से बना घर, एनआईए ने किया था सील
जांच के दौरान एनआईए ने लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के हेसला मौजा स्थित बांझीटोला में रविंद्र गंझू** के मकान को सील कर दिया था। एजेंसी की जांच में यह आरोप सामने आया था कि मकान लेवी और रंगदारी से अर्जित धन से बनाया गया था। रविंद्र गंझू** उर्फ मुकेश गंझू** उर्फ सुरेंद्र गंझू** भाकपा (माओवादी) संगठन में रीजनल कमांडर के पद पर रहकर कई बड़े हमलों और रणनीतिक अभियानों की योजना तैयार करता था।

कई बार पुलिस के हाथ से फिसला
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में रविंद्र गंझू के लोहरदगा जिले के कुडू, पेशरार, चंदवा, जोबांग और
सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय होने की कई बार सूचना मिली थी। एक बार पुलिस ने उसे लोहरदगा सीमा में घेर भी लिया था, लेकिन वह जंगल का रास्ता पकड़कर भाग निकला। सूत्र बताते हैं कि वह अक्सर सामान्य ग्रामीण की वेशभूषा में घूमता था, जिससे उसकी पहचान करना आसान नहीं होता था। कई बार उसके लोहरदगा शहर और अपने गांव आने की भी सूचना मिली, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां उसे पकड़ने से चूक गईं।

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पूछताछ से खुल सकते हैं कई बड़े राज
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि रविंद्र गंझू से पूछताछ के दौरान माओवादी संगठन के सक्रिय कैडर, हथियार आपूर्ति नेटवर्क, लेवी वसूली तंत्र, टेरर फंडिंग और सीमावर्ती जिलों में संगठन की गतिविधियों से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं। विशेष रूप से लोहरदगा, लातेहार, गुमला और पलामू के जंगलों में सक्रिय बचे हुए माओवादी नेटवर्क की जानकारी जांच एजेंसियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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