मुंगेर: ट्रेन में RAC टिकट होने के बावजूद सीट पर बैठने का अधिकार मांगना एक किशोर को भारी पड़ गया।पहले सहयात्री ने उसके साथ मारपीट की और जब उसने रेलवे हेल्पलाइन 139 पर शिकायत की तो मदद के बजाय आरपीएफ जवानों ने ही उसे धमका दिया।घटना आनंद विहार टर्मिनल से भागलपुर जा रही विक्रमशिला एक्सप्रेस में घटी। पीड़ित किशोर धरहरा निवासी प्रशांत कुमार है। नौ मई को प्रशांत कुमार अपनी मां रेखा देवी के साथ आनंद विहार टर्मिनल से विक्रमशिला एक्सप्रेस में सवार हुआ।प्रशांत का टिकट कंफर्म था, जबकि उसकी मां का टिकट आरएसी में था। मां को परेशानी न हो, इसलिए प्रशांत ने अपनी कंफर्म सीट बी-4 कोच की 59 नंबर बर्थ पर मां को बैठा दिया और खुद मां की आरएसी सीट बी-3 कोच की 47 नंबर साइड लोवर सीट पर चला गया।

आरएसी टिकट होने के कारण प्रशांत को आधी सीट पर बैठने का अधिकार था, लेकिन वहां पहले से बैठे यात्री ने उसे बैठने नहीं दिया।प्रशांत ने जब नियम की बात कही तो यात्री भड़क गया और उसके साथ गाली-गलौज करते हुए थप्पड़ मार दिया। आरोप है कि यात्री ने उसका गला भी पकड़ लिया। पास बैठे यात्रियों के कहने पर छोड़ा।
हेल्पलाइन पर शिकायत बनी मुसीबत
घटना से घबराए प्रशांत ने रेलवे हेल्पलाइन 139 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर आरपीएफ के जवान ट्रेन में पहुंचे। प्रशांत को उम्मीद थी कि उसकी समस्या का समाधान होगा, लेकिन मामला उल्टा पड़ गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सीट पर बैठे यात्री ने आरपीएफ जवान विनोद कुमार यादव को किसी व्यक्ति से फोन पर बात कराई। बातचीत के बाद आरपीएफ का रवैया अचानक बदल गया। आरोप है कि शिकायत सुनने के बजाय जवान ने प्रशांत को ही फटकार लगानी शुरू कर दी।
कंप्लेन वापस लो, नहीं तो DDU में उतार देंगे
प्रशांत के अनुसार आरपीएफ जवान ने उसे धमकाते हुए कहा कि शिकायत वापस ले लो, नहीं तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर ट्रेन से उतार दिया जाएगा। यह सुनकर किशोर सहम गया।टिकट होने के बावजूद वह डरा-सहमा पूरी रात खड़े-खड़े सफर करता रहा। इसी बीच डीडीयू स्टेशन पहुंचने से पहले बी-3 कोच की 47 नंबर सीट पर बैठा यात्री कहीं चला गया। इसके बाद प्रशांत को सीट मिली और वह बैठ सका। रविवार सुबह 6.25 बजे विक्रमशिला एक्सप्रेस धरहरा स्टेशन पहुंची, जहां प्रशांत अपनी मां के साथ उतरा।
सवालों के घेरे में RPF की कार्यशैली
घटना के बाद रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और आरपीएफ की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों का कहना है कि रेलवे हेल्पलाइन यात्रियों की सुरक्षा और सहायता के लिए बनाई गई है, लेकिन यदि शिकायतकर्ता को ही धमकाया जाए तो लोग मदद मांगने से भी डरेंगे। घटना की चर्चा यात्रियों के बीच पूरे सफर में होती रही।


