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समोसा खाने के लिए नहीं मिला 20 रुपया, बेटे ने मां की पर्स से चुराए 500 रुपए, रच दी अपहरण की कहानी

समोसा खाने के लिए नहीं मिला 20 रुपया, बेटे ने मां की पर्स से चुराए 500 रुपए, रच दी अपहरण की कहानी

डेस्कः बिहार के बगहा जिले से एक हैरान करने वाली कहानी सामने आई है। 14 साल के बच्चे के गायब होने की ऐसी कहानी सामने आई जिसको सुनकर हर कोई दंग रहा गया। सिर्फ 20 रुपये के लिए बच्चे ने ऐसे-ऐसे कदम उठाया कि परिवार से लेकर बगहा पुलिस आठ दिनों तक परेशान होती रही।
20 रुपए के लिए गुस्से में घर से निकला बच्चा : ये मामला बगहा पुलिस जिले का हैं। जहां बगहा के लौकरिया थाने में 17 अप्रैल को एक 14 वर्षीय बच्चे के अपहरण का मामला दर्ज किया गया था। बगहा पुलिस ने मामले को दर्ज होने पर त्वरित कार्रवाई करते जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई और बच्चे को सकुशल उत्तप्रदेश के प्रयागराज रेलवे स्टेशन से बरामद कर लिया और उसे उसके परिजनों को सौंप दिया।
बिना टिकट के ट्रेन से की यात्रा : पूरा मामला मात्र 20 रुपये का है।लौकरिया थाना अंतर्गत एक गांव में रहने वाले एक 14 वर्षीय बच्चे ने समोसे खाने के लिए अपनी मम्मी से 20 रुपये की मांग की थी। जब मम्मी ने उसे 20 रुपये नहीं दिया तो बच्चा नाराज होकर चुपचाप अपनी मम्मी के पर्स से 500 रुपये निकाल लिया और फिर घर से निकल गया। घर से निकलने के बाद बच्चा सीधा नरकटियागंज पहुंचा। वहां से बिना टिकट वह ट्रेन में बैठ गया और गोरखपुर चला गया।
प्रयागराज से बरामद हुआ बच्चा : गोरखपुर से उसने फिर लखनऊ की ट्रेन पकड़ ली, फिर वहां से वह गोंडा निकल गया। गोंडा से फिर वह प्रयागराज पहुंचा।बगहा पुलिस लगातार उस बच्चे के मोबाइल का टॉवर लोकेशन जांच कर रही थी। लेडी सिंघम के नाम से चर्चित रामनगर एसडीपीओ रागिनी कुमारी ने टेक्निकल जांच के बाद पता लगाया कि बच्चे का मोबाइल प्रयागराज रेलवे स्टेशन के पास ऑन हुआ है। इसके बाद उन्होंने तुरंत प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर रेलवे पुलिस से संपर्क किया, जिसके पास रेलवे पुलिस ने तुरंत बच्चे को सकुशल बरामद कर बगहा पुलिस को सूचित किया।
8 दिनों तक परिवार और पुलिस की उड़ गई नींद
जब बच्चा घर नहीं लौटा तो परिवार की चिंता बढ़ती गई।काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला, तो परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई। 17 अप्रैल को लौकरिया थाने में बच्चे के अपहरण का मामला दर्ज कराया गया। इसके बाद बगहा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने बच्चे के मोबाइल की लोकेशन ट्रैक करनी शुरू की और हर संभव जगह संपर्क बनाया।पूरे 8 दिनों तक परिवार परेशान रहा। माता-पिता की हालत बेहद खराब थी। पुलिस भी लगातार दबाव में थी, क्योंकि मामला एक नाबालिग बच्चे की सुरक्षा से जुड़ा था। यह सिर्फ एक गुमशुदगी नहीं, बल्कि परिवार के लिए सबसे कठिन समय बन गया था।

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