रांची के Orient Craft में दूसरे दिन भी आंदोलन जारी, हजारों महिलाओं गेट के बाहर धरने पर बैठीं

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April 22, 2026

The protest continued for the second day at Orient Craft in Ranchi, with thousands of women protesting outside the gate.

रांचीः गारमेंट उद्योग की जानमानी कंपनी Orient Craft के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश दूसरे दिन भी जारी है । हजारों की तादाद में महिलाएं कंपनी के गेट के बाहर धरने पर बैठीं है । तीन महीने से वेतन नहीं मिलने समेत कई दूसरी शिकायतों के साथ ये बड़ी संख्या में कर्मचारी धरना दे रही हैं । 

ओरिएंट क्राफ्ट नामक कंपनी में काम करने वाली इन महिलाओं का आरोप है कि उन्हें तीन महीने से वेतन नहीं मिल पाया है, जिस कारण वो अपने मकान का किराया भी नहीं दे पा रही हैं। इस कंपनी को पूर्व की रघुवर दास सरकार ने टोकन मनी लेकर कई एकड़ जमीन दी थी, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके।

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प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि प्रबंधन की मनमानी के कारण उनका जीवन-यापन कठिन हो गया है। प्रबंधन पिछले तीन महीनों से वेतन देने में विफल रहा है। जबकि हर महीने की 7 तारीख को भुगतान का वादा किया जाता है, लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं होता।
महिला कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें न तो कई सालों से वेतन वृद्धि मिली है और न ही ओवरटाइम के लिए भुगतान किया जाता है। उनसे रोज आधा से पौन घंटा अतिरिक्त काम कराया जाता है, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है। ओवरटाइम का पैसा देने में भी कंपनी प्रबंधन की ओर से आनाकानी की जाती है।

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महिला कर्मचारियों के अनुसार, उनकी मासिक आय लगभग 13,000 से 17000 रुपये है, जिसमें से वे 3,000 रुपये सिर्फ कमरे के किराए पर खर्च करती हैं। वेतन समय पर न मिलने के कारण उनके लिए मकान का किराया चुकाना और मूलभूत जरूरतों को पूरा करना नामुमकिन हो गया है। यहां काम करने वाली कई महिलाएं रांची के आसपास के अलावा ओडिशा और पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से काम करने पहुंची हैं।
जब इस मामले पर प्रबंधन से बात की गई, तो उन्होंने अपनी दलील में नुकसान और ग्लोबल फैक्टर्स का हवाला दिया। प्रबंधन का दावा है कि युद्ध की स्थिति और अमेरिका-भारत ट्रेड डील के कारण कंपनी को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
दूसरी तरभ कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन एक तरफ तो नुकसान का रोना रोता है, लेकिन दूसरी तरफ उनसे लगातार टारगेट के अनुसार काम करवा रहा है। जब सैलरी बढ़ाने की बात आती है, तो प्रबंधन उसे टाल देता है और काम के नए दबाव बनाता है।

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इस मामले ने एक और गंभीर मोड़ तब लिया जब फैक्ट्री के लिए जमीन आवंटन पर सवाल उठे। यह फैक्ट्री जिस जगह पर स्थित है, वह पहले पशुपालन विभाग की जमीन थी। आरोप है कि पूर्व की रघुवर दास सरकार ने इसे मात्र एक रुपये में ओरिएंट क्राफ्ट जैसी बड़ी कंपनी को यह कहते हुए दे दिया था कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
बताया गया है पिछली सरकार ने रांची होटवार परिसर स्थित पशुपालन विभाग की 25 एकड़ जमीन गारमेंट कंपनी ओरिएंट क्राफ्ट को दी गई थी। कंपनी ने इस पर टेक्सटाइल्स पार्क बनाया। इसमें 10 एकड़ जमीन पर प्लांट और कार्यालय है, शेष जमीन पर एक-एक एकड़ का 15 प्लाॅट दूसरी कंपनी को सबलेट करने की बात कही गई थी।

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