पटनाः बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने अपने भरोसेमंद श्रवण कुमार को जेडीयू विधायक दल का नेता बनाया है। उनके नाम को औपचारिक रूप से विधानसभा भेजे जाने के बाद अधिसूचना भी जारी कर दी गई। श्रवण कुमार नालंदा से लगातार 31 साल से विधायक हैं। वह नीतीश के करीबी नेताओं में से एक हैं और बिहार सरकार में मंत्री भी रहे हैं।श्रवण कुमार लगातार 9 बार से विधायक है जिसमें सात बार वो जेडीयू से विधायक रहे थे। नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस ने लालू यादव से अलग होकर जब समता पार्टी बनाई थी उस समय श्रवण कुमार पार्टी की नींव रखने वाले नेताओं में एक थे। 1995 में उन्होंने पहली बार समता पार्टी के टिकट पर नालंदा से चुनाव जीता था। 2025 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के कौशलेंद्र कुमार को 33 हजार वोटों से हराया था।
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श्रवण कुमार पूर्व मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं और पूर्व सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।श्रवण कुमार नालंदा विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 1995 से लगातार विधायक चुने जाते रहे हैं। उनका यह अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत आधार माना जा रहा है।20 अप्रैल को हुई जदयू विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नीतीश कुमार को नेता चयन के लिए अधिकृत किया गया था। इसके बाद कई नामों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन नीतीश कुमार ने सभी कयासों पर विराम लगाते हुए श्रवण कुमार के नाम पर मुहर लगा दी।
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हाल ही में श्रवण कुमार की सुरक्षा बढ़ाकर उन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। यह निर्णय उनके बढ़ते राजनीतिक महत्व को दर्शाता है।इससे पहले जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया जा चुका है। ऐसे में श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाकर पार्टी ने संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की है।


