रामगढ़ः झारखंड में कोयला-बालू के तस्करी का खेल खूब सुर्खियों में रहता है। लेकिन एक ऐसा तस्करी का खेल भी खेला जा रहा है जो न मीडिया के सुर्खियों में है, न पुलिस के वरीय अधिकारियों की नजर में और न ही प्रशासन को ये खेल दिख रहा है। ये खेल हो रहा है अवैध तरीके से डोडा को झारखंड से बाहर ले जाने का। इस खेल का मुख्य केंद्र बना रामगढ़ जिला।
एनएच-33 पर ऐसे होता हैं खेल
रामगढ़ जिले में रात के अंधेरे में एनएच पर पुलिस-प्रशासन की आंख के नीचे एक ऐसा खेल होता है जिसे वहां से गुजरने वाले गाड़ियों की रफ्तार जल्दी समझने नहीं देती। रांची-पटना एनएच-33 पर डोडा लदी गाडियों का रूट, नंबर, टाइमिंग सब पहले से तय होता है। महज एक इशारा और खेल खत्म हो जाता है। बस एक इशारे से डोडा लगी गाड़ियां नजर से ओझल हो जाती है।
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ऐसे शुरू होता हैं असली खेल
सूत्र बताते है कि रामगढ़ में डोडा से जुड़ी हर हलचल पर सबसे पुख्ता जानकारी कथित रिकवरी गैंग और सीजर गैंग से जुड़े लोगों के पास होता है। जैसे ही खूंटी जिले से नशे का जखीरा निकलता है जिले के कथित “रोड़ किंग” एक्टिव हो जाते है। अलग-अलग गाड़ियों में गैंग सीमाओं पर तैनात हो जाती है।
तय जगह, तय समय, तय शिकार
और फिर होता है आमना-सामन
डील बनी- सब सेट
डील टूटी-वहीं गाड़ी पुलिस के हवाले, या तो हिस्सा दो, या सिस्टम को सौंप दिए जाओ।
NOTE-सीजर गैंग रामगढ़ में किस तरह से एक्टिव है ये जानना हो तो 25 अक्टूबर 2025 की बात करनी जरूरी है। जब चरही थाना क्षेत्र में एक फर्जी सीजर गिरोह का भंडाफोड़ किया गया था। सीजर गिरोह ने पंजाब नंबर की एक डोडा लदे ट्रक को पकड़ा। इसमें 10 बोरा डोडा लदा हुआ था। गिरोह के सदस्यों ने ड्राइवर से 10 लाख रुपये की मांग की। रात भर पैसे को लेकर सौदेबाजी चलती रही। इस बात की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ बैद्यनाथ प्रसाद के नेतृत्व में पुलिस ने छापेमारी की और फर्जी सीजर गिरोह के चार सदस्यों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। असली और नकली सीजर गिरोह को लेकर जानकारी अगले खुलासे में होगी।
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मोबाइल नेटवर्क से ही चलता है पूरा नेटवर्क
बताया जाता है कि बिना इंट्री की डोडा लदी गाड़ियां जैसे ही खूंटी से हजारीबाग की ओर बढ़ती हैं— उनकी पूरी कुंडली पहले से तैयार रहती है रांची से ही गुर्गे बाज़ की तरह पीछा करने लगते हैं
मोबाइल फोन हर पल अपडेट देता है
कब चली
कहां रुकी
अगला मोड़ कौन सा
यहां न रिश्ता काम आता है,
न कानून—
सबसे बड़ा है रुपैया।
हैरानी की बात यह कि इतना बड़ा नेटवर्क कथित तौर पर वरीय अधिकारियों की नजरों से दूर चलता रहा।
मांडू बना सबसे सुरक्षित अड्डा
इलाके में चर्चा है कि जैसे ही डोडा लदी गाड़ियां रामगढ़ थाना क्षेत्र पार करती हैं— सूचना सीधे कुज्जू पहुंच जाती है।
इसके बाद मांडू क्षेत्र में बैठे “बाज़ और चील” हाई अलर्ट मोड में आ जाते हैं।
कथित सुरक्षित प्वाइंट: हेसागढ़ा
मांडू फॉरेस्ट ऑफिस के आसपास
मणिपाल स्कूल ,मांडू डीह
यहां गाड़ियां रोकी जाती हैं…
और कानून तमाशबीन बना रह जाता है।
⚠️ बड़ा सवाल
यदि सूत्रों के अनुसार यह सब सच है—
तो इतने बड़े नेटवर्क पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं? एक ही पैटर्न बार–बार क्यों दोहराया जा रहा है? और सबसे अहम—
कौन दे रहा है वरदहस्त? हालांकि, इस पूरे मामले में अब तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है,
लेकिन घटनाओं की समानता किसी संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा जरूर करती है।
🟡 अगले अंक में खुलासा:
सिंडिकेट के सभी सदस्यों के नाम
खूंटी से रामगढ़ तक पूरा कनेक्शन
कौन है गैंग का मास्टरमाइंड?
📌 यह रिपोर्ट पूरी तरह सूत्रों पर आधारित है।




