

रांची। क्या झारखंड के जिलों के मालिक यानि उपायुक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अब तक बेवकूफ बनाते रहे हैं । क्या झारखंड के आईएएस वन में रहने वालों को ज़मीन का पट्टा देने के नाम पर ठगते रहे है। ये सवाल नहीं बल्कि आरोप है, और आरोप कोई और नहीं बल्कि खुद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगा रहे हैं। उन्होंने रांची में अबुआ बीर दिशोम अभियान 2023 के शुभारंभ के मौक़े पर जो तेवर का दिखाए उसे आमतौर पर नहीं देखा गया है ।
अधिकारियों से नाराज़ मुख्यमंत्री
हेमंत सोरेन अधिकारियों के कामकाज से इतने नाराज़ थे कि उन्होंने ना सिर्फ फटकार लगाई बल्कि चेतावनी भी देते हुए हमर जंगल, हमर अधिकार के तहत अबुआ दिशोम अभियान को गंभीरता से लेने के चेतावनी दी ।
क़ानून 2006 में बना, अब तक नहीं मिले अधिकार
दरअसल सीएम इस बात से नाराज़ थे कि 2006 में बने वन अधिकार क़ानून के इतने साल बाद भी जिला उपायुक्तों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया । उन्होंने कहा कि ये अभियान कूड़े की ढेर में पढ़ा था इसलिए इसे अभियान के तौर पर लेना पड़ा ।
जब डीसी नहीं बता पाए अबुआ बीर दिशोम का मतलब
हेमंत सोरेन उपायुक्तों से इतने नाराज़ थे कि अबुआ बीर दिशोम का मतलब भी सभा में मौजूद अधिकारियों से पूछ लिया । ज्यादातर अधिकारी बगले झाकंते दिखे ।
वन अधिकारियों से भी सीएम की नाराज़गी दिखी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य की चिंता करते हुए इस अबुआ वीर दिशोम अभियान पर काम करे ।




