रांची : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर लोकसभा में हुई बहस पर लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के भाषण का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री के वक्तव्य को हताशा भरा और संकीर्ण सोच बताया।
तथ्यों पर आधारित था प्रियंका गांधी का भाषण
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा चर्चा की शुरुआत जिस तरह की गई, वह निराशा और सीमित सोच को दर्शाती है, जबकि प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में तथ्यों के साथ बात रखी। उन्होंने कहा कि दोनों भाषणों के बीच यही बुनियादी अंतर है। प्रियंका गांधी ने ऐतिहासिक संदर्भों और संवैधानिक तथ्यों के आधार पर अपनी बात मजबूती से रखी।
वंदे मातरम को संविधान के संदर्भ में देखें
उन्होंने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस का रुख हमेशा संतुलित और समावेशी रहा है। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित इस गीत के केवल दो छंदों को ही राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया, यह निर्णय भी कांग्रेस ने सोच-विचार कर किया था। सुखदेव भगत ने कहा कि यह कोई मात्र राष्ट्रीय भक्ति गीत नहीं, बल्कि इसे ऐतिहासिक और संवैधानिक नजरिये से समझने की आवश्यकता है, क्योंकि भारत विविधताओं वाला देश है।
संविधान सभा के निर्णयों का हवाला
सांसद ने कहा कि वंदे मातरम को लेकर संविधान सभा में भी व्यापक चर्चा हुई थी, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान नेता शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री इन महापुरुषों के उद्देश्य और विचारों का भी अपमान कर रहे हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव पर टिप्पणी
सुखदेव भगत ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी को इस मुद्दे को लेकर जटिलता इसलिए है क्योंकि उनका स्वतंत्रता आंदोलन से कोई सीधा जुड़ाव नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल संगठन का इतिहास अंग्रेजों के साथ रहने का रहा है। सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री को बयानबाजी के बजाय तथ्य और सच्चाई के साथ देश के सामने अपनी बात रखनी चाहिए







































































































